
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार महेश्वरी व न्यायमूर्ति अतुल एस. चंदुलकर की युगल ने मप्र लोकायुक्त को सूचना के अधिकार 2005 से बाहर रखने की मप्र शासन की 2011 अधिसूचना पर वैधानिकता पर सुनवाई पूरी होने के साथ ही आदेश सुरक्षित कर लिया है गई।
राज्य की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने पक्ष रखा। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा था कि आखिर किस कानूनी आधार पर मप्र लोकायुक्त संगठन को सूचना के अधिकार कानून से छूट दी गई है।
कोर्ट ने कहा था कि राज्य सरकारें सिर्फ सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 24(4) के तहत उन्हीं संस्था या संगठनों को छूट दे सकती हैं जो खुफिया और सुरक्षा संगठन (इंटेलिजेंस और सिक्योरिटी आर्गनाइजेश) है। मप्र का लोकायुक्त संगठन के जिम्मे ऐसा कौन सा काम है जो धारा 24 (4) के दायरे में आता है। दरअसल, हाई कोर्ट साढ़े चार साल पहले (20 दिसंबर 2021) में ही कामता प्रसाद के केस में लोकायुक्त संगठन को आदेश दे चुका है कि वह सूचना के अधिकार के तहत जानकारी देने से मना नहीं कर सकता है।
सरकार ने अगस्त 2011 में एक अधिसूचना जारी कर लोकायुक्त के विशेष पुलिस स्थापना (एसपीई) और राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) को आरटीआई के दायरे से बाहर कर दिया था। सरकार का तर्क था कि शिकायतकर्ताओं और गवाहों की सुरक्षा के लिए यह जरूरी है। हाई कोर्ट ने लोकायुक्त पर पांच हजार का जुर्माना लगाते हुए 30 दिन के भीतर जानकारी देने के निर्देश दिए थे। हाई कोर्ट के इसी आदेश के विरुद्ध लोकायुक्त संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।
उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2012 में यूपी लोकायुक्त संगठन को आरटीआई से बाहर रखने की अधिसूचना जारी की थी। लेकिन इस अधिसूचना को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया था। इलाहबाद हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि भ्रष्टाचार विरोधी जांच को पारदर्शी प्रक्रिया से अलग नहीं रखा जा सकता। तब से ही यूपी लोकायुक्त में आरटीआई कानून लागू है।
भ्रष्टाचार के विरुद्ध देश के सबसे मजबूत लोकायुक्त संगठनों में से एक कर्नाटक लोकायुक्त भी आरटीआई के तहत सूचनाएं साझा करता है। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्य के लोकायुक्त संगठन भी आरटीआई अधिनियम की धारा 4 (1) (b) के तहत अपनी सभी जानकारियों की स्वैच्छिक घोषणा के तहत वेबसाइट पर ही सार्वजनिक कर रखी हैं। केरल, महाराष्ट्र, राजस्थान राज्यों में भी लोकायुक्त संगठनों में आरटीआई के अंतर्गत लोक सूचना अधिकारी नियुक्त हैं।