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MP High Court ने कहा कि ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करना उसकी व्यावसायिक मृत्यु के समान

राज्य सरकार ने तर्क दिया था कि यह ठेका विवाद है, अतः ठेकेदार को पंचाट जाना चाहिए। पूर्व के गौरी गणेश और अवस्थी ब्रदर्स मामलों में भी यही रुख अपनाया गय...और पढ़ें

By Surendra DubeyEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Sat, 08 Aug 2026 10:56:55 AM (IST)Updated Date: Sat, 08 Aug 2026 10:57:19 AM (IST)
MP High Court ने कहा कि ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करना उसकी व्यावसायिक मृत्यु के समान
पीठ ने स्पष्ट किया कि ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने का अधिकार केवल मुख्य अभियंता या उनके समकक्ष अधिकारी के पास ही सुरक्षित है।

HighLights

  1. हाई कोर्ट के पांच जजों की पीठ का बड़ा फैसला
  2. ब्लैकलिस्ट करना पंचाट के क्षेत्राधिकार से बाहर
  3. सीधे रिट याचिका पोषणीय, आदेश पारित नहीं कर सकते

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के 5 जजों की वृहद पीठ ने सरकारी ठेकों और ब्लैकलिस्टिंग की शक्तियों को लेकर एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायधीश विवेक रूसिया की अध्यक्षता वाली वृहद पीठ ने स्पष्ट किया है कि किसी ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करना उसकी व्यावसायिक मृत्यु के समान है।

अनुच्छेद 226, 227 के तहत रिट याचिका दायर कर सकता

कोर्ट ने माना कि ब्लैकलिस्टिंग से व्यवसाय और साख को होने वाली गैर-मौद्रिक क्षति का पैसों में आकलन नहीं किया जा सकता, इसलिए यह विषय मध्य प्रदेश मध्यस्थम अधिकरण अधिनियम, 1983 के पंचाट (अधिकरण) के क्षेत्राधिकार से पूर्णतः बाहर है। ऐसे में संयुक्त आदेश के बावजूद प्रभावित ठेकेदार सीधे हाई कोर्ट में संविधान के अनुच्छेद 226, 227 के तहत रिट याचिका दायर कर सकता है।


सिद्धांतों के विपरीत बताते हुए फर्म ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था

अन्य वरिष्ठ अधिवक्ताओं के साथ एडवोकेट विवेक रंजन पांडे ने बताया कि मूल मामला मेसर्स नितिन एंटरप्राइजेज का है, जिन्हें नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने 30 अक्टूबर 2020 को एक आदेश जारी कर अनुबंध रद्द करने के साथ तीन वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया था। विभाग की इस कार्रवाई को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत बताते हुए फर्म ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

सक्षम या अपीलीय प्राधिकारी केवल मुख्य अभियंता को सिफारिश भेज सकते हैं

कोर्ट ने लोक निर्माण विभाग के वर्ष 2015 के परिपत्र का हवाला देते हुए एक अन्य महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था भी दी। पीठ ने स्पष्ट किया कि ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने का अधिकार केवल मुख्य अभियंता या उनके समकक्ष अधिकारी के पास ही सुरक्षित है। अनुबंध के तहत अन्य सक्षम या अपीलीय प्राधिकारी केवल मुख्य अभियंता को सिफारिश भेज सकते हैं, लेकिन स्वयं ब्लैकलिस्टिंग का आदेश पारित नहीं कर सकते।

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