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नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। कटनी की फरार सीएसपी नेहा पच्चीसिया को हाई कोर्ट से राहत मिलेगी या नहीं, इसका फैसला अब न्यायालय सुनाएगा। एफआईआर निरस्त करने और अग्रिम जमानत की मांग को लेकर दायर याचिकाओं पर तीन दिन तक चली मैराथन सुनवाई के बाद बुधवार को उभयपक्षों की बहस पूरी हो गई।
न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति राजकुमार चौबे की युगलपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। सुनवाई के दौरान नेहा पच्चीसिया की ओर से दलील दी गई कि विवादित जमीन की खरीद-फरोख्त में उनकी कोई भूमिका नहीं थी।
बचाव पक्ष के अनुसार, जमीन मारूफ अहमद हनफी के नाम पर खरीदी गई थी और उसके बैंक खाते में क्षितिज राज पात्रे ने राशि स्थानांतरित की थी। नेहा पच्चीसिया के बैंक खाते से इस लेनदेन में कोई भुगतान नहीं हुआ। उनकी ओर से तर्क दिया गया कि जमीन के सौदे में उनकी भूमिका साबित करने वाला कोई साक्ष्य नहीं है।
इसी आधार पर एफआईआर निरस्त करने और अग्रिम जमानत का लाभ देने की मांग की गई। कटनी के कुठला थाना क्षेत्र में धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं के तहत नेहा पच्चीसिया समेत तीन आरोपितों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया गया था।
पुलिस ने तीनों की गिरफ्तारी पर 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। आरोप है कि कुठला थाना क्षेत्र के एक हत्या के मामले में निर्धारित समय-सीमा के भीतर चालान पेश नहीं होने से संबंधित आरोपित को जमानत का लाभ मिल गया था। आरोपों के मुताबिक, इसके एवज में संबंधित आरोपितों की जमीन कम कीमत पर एक एजेंट के नाम से खरीदी गई थी। हालांकि, नेहा पच्चीसिया ने जमीन के सौदे में अपनी भूमिका से इनकार किया है।
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एयर होस्टेस से पुलिस अधिकारी तक का सफर
नेहा पच्चीसिया मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले की पचोर तहसील की निवासी हैं। पुलिस सेवा में आने से पहले वह एयर इंडिया में एयर होस्टेस के रूप में काम कर चुकी हैं। 12 वीं के बाद उन्होंने एविएशन की पढ़ाई की और बाद में सरकारी सेवा में आने का निर्णय लिया।
वर्ष 2012 में एमपीपीएससी परीक्षा देने के बाद 2016 में घोषित अंतिम परिणाम में उन्होंने प्रदेश में 20वीं रैंक हासिल की। इसके बाद डीएसपी के रूप में पुलिस सेवा में आईं। उनकी पहली पोस्टिंग गुना में सीएसपी के तौर पर हुई।
बाद में उन्होंने भोपाल स्थित पुलिस मुख्यालय और खंडवा में भी सेवाएं दीं। मई 2025 में उनका तबादला कटनी किया गया, जहां उन्हें नगर पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया था। अब हाई कोर्ट के सुरक्षित फैसले से स्पष्ट होगा कि उन्हें एफआईआर निरस्त कराने और अग्रिम जमानत के मामले में राहत मिलती है या नहीं।
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