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अविवाहित दिव्यांग बेटी को भी मिलेगी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पेंशन, हाई कोर्ट ने 14 साल पुराना आदेश पलटा

राज्य शासन महज एक परिपत्र के आधार पर इस वैधानिक अधिकार से वंचित नहीं कर सकता।

By Surendra DubeyEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Thu, 02 Jul 2026 12:26:18 PM (IST)Updated Date: Thu, 02 Jul 2026 12:26:18 PM (IST)
अविवाहित दिव्यांग बेटी को भी मिलेगी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पेंशन, हाई कोर्ट ने 14 साल पुराना आदेश पलटा
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि 2004 का परिपत्र 1972 के नियमों पर प्रभावी नहीं हो सकता।

HighLights

  1. याचिकाकर्ता 75 प्रतिशत दिव्यांग हैं
  2. छतरपुर कलेक्टर ने उनके पक्ष में अनुशंसा की थी,
  3. समस्त बकाया राशि 60 दिनों के भीतर भुगतान करें

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति मनिंदर सिंह भट्टी की एकलपीठ ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए स्पष्ट किया है कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की अविवाहित व आश्रित दिव्यांग पुत्री भी वर्ष 1972 के नियमों के तहत पेंशन की हकदार है।

18 दिसंबर, 2012 का अस्वीकृति आदेश निरस्त कर दिया

राज्य शासन महज एक परिपत्र के आधार पर इस वैधानिक अधिकार से वंचित नहीं कर सकता। कोर्ट ने छतरपुर निवासी कु. बबीता खत्री की याचिका स्वीकार करते हुए 18 दिसंबर, 2012 का अस्वीकृति आदेश निरस्त कर दिया।

परिपत्र का हवाला देकर दावा खारिज कर दिया

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सुधा गौतम ने पक्ष रखा, जबकि राज्य की ओर से पैनल अधिवक्ता अंकिता खरे उपस्थित हुईं। याचिकाकर्ता 75 प्रतिशत दिव्यांग हैं। उनकी माता, जो स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की पत्नी थीं, के निधन के बाद पेंशन बंद हो गई थी। छतरपुर कलेक्टर ने उनके पक्ष में अनुशंसा की थी, लेकिन राज्य शासन ने 2004 के परिपत्र का हवाला देकर दावा खारिज कर दिया।


परिपत्र वैधानिक नियमों को निरस्त या सीमित नहीं कर सकते

हाई कोर्ट ने कहा कि मध्य प्रदेश स्वतंत्रता संग्राम सैनिक सम्मान निधि नियम, 1972 में परिवार की परिभाषा में अविवाहित पुत्री शामिल है। कार्यपालिका के परिपत्र वैधानिक नियमों को निरस्त या सीमित नहीं कर सकते।

2004 का परिपत्र 1972 के नियमों पर प्रभावी नहीं हो सकता

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि 2004 का परिपत्र 1972 के नियमों पर प्रभावी नहीं हो सकता। कोर्ट ने राज्य सरकार को दिसंबर 2012 से प्रभावी पेंशन जारी करने, समस्त बकाया राशि की गणना कर 60 दिनों के भीतर भुगतान करने तथा भविष्य में भी नियमों के अनुसार नियमित पेंशन देने का निर्देश दिया।

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