

नईदुनिया, प्रतिनिधि, जबलपुर। शहर में लगातार बढ़ रही ई-रिक्शा की संख्या अब यातायात व्यवस्था के लिए चुनौती बनती जा रही है। प्रमुख सड़कों और चौराहों पर ई-रिक्शा व आटो के बेतरतीब खड़े होने और मनमाने तरीके से संचालन के कारण कई जगह यातायात प्रभावित हो रहा है। सवारी बैठाने के लिए चालक बीच सड़क पर अचानक वाहन रोक देते हैं या ब्रेक लगा देते हैं, जिससे पीछे चल रहे वाहनों को भी अचानक गति कम करनी पड़ती है। इससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
आने वाले समय में यही स्थिति जबलपुर में शुरू होने जा रही ई-बस सेवा के लिए भी परेशानी खड़ी कर सकती है। निर्धारित रूट पर ई-रिक्शा की अनियंत्रित आवाजाही से सार्वजनिक परिवहन की गति और समयबद्धता प्रभावित होने की आशंका है।
जबलपुर में 40 इलेक्ट्रिक बसों के साथ पहले से संचालित 45 मेट्रो बसों को मिलाकर कुल 85 बसों का संचालन होगा। ई-बस सेवा का उद्देश्य शहरवासियों को तेज, सुरक्षित और व्यवस्थित सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराना है। इसके लिए बसों को निर्धारित रूट और समय के अनुसार चलाना जरूरी होगा।
यदि इन्हीं मार्गों पर बड़ी संख्या में ई-रिक्शा बिना निर्धारित व्यवस्था के चलते या रुकते रहे तो ई-बसों को बार-बार यातायात में फंसना पड़ सकता है। इससे बसों की समयबद्धता प्रभावित होगी और यात्रियों को अपेक्षित सुविधा मिलने में परेशानी हो सकती है।
शहर के प्रमुख मार्गों पर सवारी बैठाने के लिए ई-रिक्शा चालक कहीं भी वाहन रोक देते हैं। कई जगह एक साथ कई आटो खड़े रहते हैं, जिससे सड़क की उपलब्ध चौड़ाई कम हो जाती है। पीछे से आने वाले वाहनों को अचानक ब्रेक लगाना पड़ता है और यातायात की रफ्तार प्रभावित होती है।
मालगोदाम, मालवीय चौक, तीन पत्ती, शास्त्रीब्रिज, भंवरताल, छोटीलाइन फाटक, अधारताल, रद्दीचौकी, गोहलपुर और दमोहनाका सहित अन्य प्रमुख चौराहों पर आटो सड़क घेरकर खड़े किए जा रहे हैं। स्थिति यह है कि चालक जहां जगह मिलती है, वाहन रोककर सवारी बैठाने लगते हैं। इससे वाहन चालकों और राहगीरों को परेशानी होती है। कई बार बीच सड़क या चौराहे पर अचानक ऑटो रुकने से दुर्घटनाएं भी होती हैं और वाहनों को निकलने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिलती।
व्यस्त बाजार क्षेत्रों के अलावा रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और प्रमुख चौराहों के आसपास यह समस्या अधिक दिखाई देती है। यहां यात्रियों की आवाजाही ज्यादा होने के कारण आटो के बेतरतीब रुकने से यातायात व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ई-रिक्शा संचालन के लिए स्पष्ट रूट, निर्धारित स्टैंड और वाहनों की संख्या तय की जानी चाहिए। चौराहों और बस स्टाप के आसपास अनधिकृत पार्किंग पर भी प्रभावी रोक जरूरी है।
जबलपुर में आटो संचालन को व्यवस्थित करने के लिए वर्ष 2018 में आटो पार्किंग स्थल निर्धारित किए गए थे। इसके अलावा 17 चौराहों पर आटो लेन बनाई गई थी, लेकिन अब ये लेन दिखाई नहीं देतीं। व्यवस्था के अभाव में सड़क और चौराहों पर आटो का दबाव बढ़ रहा है।
शहर में 10 हजार ऑटो और ई-रिक्शा पंजीकृत हैं। इनमें अधिकांश बिना रजिस्ट्रेशन और परमिट के संचालित होने की बात सामने आई है। इनमें से चार हजार से ज्यादा आटो शहर की सड़कों पर चल रहे हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने बढ़ते ई-रिक्शा संचालन को व्यवस्थित करने की चुनौती है। समय रहते व्यवस्था नहीं सुधरी तो आने वाले समय में ई-बस सेवा के सुचारु संचालन में ई-रिक्शा बड़ा रोड़ा बन सकते हैं।