20 साल बाद भी नियमित क्यों नहीं किए गए अतिथि व्याख्याता, 486 शिक्षकों की अपील पर हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा स्पष्टीकरण
उनकी जिम्मेदारियां नियमित शिक्षकों के समान हैं। सवाल उठता है कि जब हर साल नियुक्तियां होती हैं, तो अपीलकर्ताओं को नियमित क्यों नहीं किया जा रहा है। ...और पढ़ें
Publish Date: Sat, 28 Mar 2026 09:39:11 PM (IST)Updated Date: Sat, 28 Mar 2026 09:41:48 PM (IST)
अतिथि व्याख्याताHighLights
- उनकी जिम्मेदारियां नियमित शिक्षकों के समान हैं।
- सवाल उठता है कि जब हर साल नियुक्तियां होती हैं।
- अपीलकर्ताओं को नियमित क्यों नहीं किया जा रहा है।
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने शासकीय महाविद्यालयों के 486 अतिथि व्याख्याताओं की अपील पर सरकार से स्पष्टीकरण तलब कर लिया है। मामला 20 साल बाद भी नियमित न किए जाने के रवैये को चुनौती से संबंधित है।
अगली सुनवाई अप्रैल के अंतिम सप्ताह में नियत की गई है। अपीलकर्ता मुरैना निवासी विनायक सिंह सहित अन्य की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता कालिन गोन्जाल्विस ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पक्ष रखा।
उन्होंने दलील दी कि अपीलकर्ता दो दशक से अतिथि व्याख्याता के रूप में सेवा देने का विशद अनुभव रखते हैं। यूजीसी के द्वारा नियत सभी मापदंडों की कसौटी पर खरे हैं।
उनकी जिम्मेदारियां नियमित शिक्षकों के समान हैं। सवाल उठता है कि जब हर साल नियुक्तियां होती हैं, तो अपीलकर्ताओं को नियमित क्यों नहीं किया जा रहा है।
दरअसल, मामले में हाई कोर्ट की एकलपीठ ने याचिकाएं निरस्त कर दी थीं। जिसके बाद अपील के जरिए युगलपीठ की शरण ली गई है। अपीलकर्ताओं का मुख्य तर्क यही है कि वर्षों से लगातार सेवा देने के बावजूद नियमितीकरण क्यों नहीं किया जा रहा है।