
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने अवमानना की आरोपित भोपाल नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन को शुक्रवार को अपील पर सुनवाई करते हुए अंतरिम राहत प्रदान कर दी।
दरअसल, गुरुवार को न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने निगमायुक्त जैन को अवमानना का दोषी करार दिया था और शुक्रवार को उसकी सजा के लिए सुनवाई निर्धारित की थी।
इसी बीच नगर निगम भोपाल व निगमायुक्त की ओर से युगलपीठ के समक्ष अपील पेश की गई। जिसकी सुनवाई करते हुए युगलपीठ ने एकलपीठ के आदेश के क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तिथि 18 फरवरी तक रोक लगा दी।
नगर निगम आयुक्त जैन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एचएस रूपराह व सुयश मोहन गुरू ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि हाई कोर्ट ने अवमानना की कार्रवाई शुरू करने का अधिकार है तभी है जब न्यायालय के आदेशों का जानबूझकर उल्लंघन हुआ हो।
मर्लिन बिल्डकान प्राइवेट लिमिटेड की पूरी याचिका में ऐसा कोई आरोप नहीं है कि नगर निगम ने उच्च न्यायालय या उसके अधीनस्थ किसी न्यायालय द्वारा पारित किसी आदेश या निर्देश का उल्लंघन किया हो।
कंटेम्प्ट आफ कोर्ट एक्ट-1971 के सेक्शन 10 के तहत हाई कोर्ट सिर्फ अपने आदेश या अपने अधीनस्थ न्यायालय के आदेश का जानबूझकर उल्लंघन के लिए अवमानना कार्यवाही कर सकता है।
हाई कोर्ट के पास सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई शुरू करने का अधिकार नहीं है। अपील में मर्लिना बिल्डकान प्राइवेट लिमिटेड, शालिनी तलेजा व नम्रता चौधरी को अनावेदक बनाया गया है।
उल्लेखनीय है कि गुरुवार को एकलपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों की अनदेखी को गंभीर मानते हुए नगर निगम, भोपाल की आयुक्त संस्कृति जैन को अवमानना का दोषी ठहराया था। कोर्ट ने साफ किया था कि नगर निगम द्वारा की गई तोड़फोड़ की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियत प्रक्रिया के अनुरूप नहीं थी।
यह मामला मर्लिन बिल्डकान प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर याचिका से संबंधित है। याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया कि नगर निगम ने 18 नवंबर, 2025 को उसकी संपत्ति के फ्रंट हिस्से को विहित प्रक्रिया अपनाए बिना तोड़ दिया। नगर निगम की ओर से दलील दी गई कि निर्माण अवैध था। सात नवंबर, 2024 को दी गई अनुमति निरस्त की जा चुकी थी। 14 मई, 2025 को नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद नियमानुसार कार्रवाई की गई।
हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा था कि सुप्रीम कोर्ट की 2025 में जारी गाइडलाइन का पालन नहीं किया गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता को नैसर्गिक न्याय सिद्यांत अनुरूप न तो व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दिया गया, न ही सुनवाई की कोई कार्यवाही दर्ज की गई और न ही कोई अंतिम आदेश पारित किया गया। इसके स्थान पर सीधे तोड़फोड़ की कार्रवाई कर दी गई, जो अवैधानिक है।
दरअसल, नगर निगम भोपाल के द्वारा मर्लिन बिल्डकान प्राइवेट लिमिटेड की श्यामला हिल्स अंतर्गत नादिर कालोनी में स्थित 3520 वर्ग फीट में बिल्डिंग की अनुमति 28 अगस्त, 2025 को निरस्त कर दी गई थी। जिसके विरुद्ध हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका के लंबित रहने के दौरान नगर निगम ने विगत 18 जनवरी को बिल्डिंग का एक हिस्सा तोड़ दिया था। हाई कोर्ट की एकलपीठ ने नगर निगम की कार्यवाही को सुप्रीम कोर्ट द्वारा डेमोलेशन आफ स्ट्रक्चर एक्ट के तहत पारित दिशा-निर्देश के विपरीत पाया था। एकलपीठ ने मनमानी कार्यवाही किए जाने पर नगर निगम आयुक्त, भोपाल संस्कृति जैन को तलब किया था।