
नईदुनिया प्रतिनिधि जबलपुर। पनागर वन परिक्षेत्र के भरदा पड़रिया अंतर्गत द्वारिका परिसर में ग्रामीणों द्वारा पकड़े गए मगरमच्छ का रेस्क्यू कर उसे स्कूटर पर लादकर परियट नदी में छोड़ने का वीडियो इंटरनेट पर प्रसारित हुआ है।
इस सुरक्षा नियमों को दरकिनार कर वन्य जीव का इस तरह से परिवहन किए जाने का वीडियो वायरल होने के बाद वन विभाग में भी हड़कंप मच गया है। वनमंडलाधिकारी ने मामले की जांच कराने की बात कही है।
विदित हो कि परियट नदी से निकल कर द्वारिका परिसर पहुंचा मगरमच्छ पांच सितंबर से ग्रामीणों के लिए दहशत का पर्याय बना था। 11 सितंबर को वन विभाग के कर्मचारियों की मौजूदगी में पकड़ मगरमच्छ को परियट नदी में छोड़ दिया गया। परंतु सुरक्षित वाहन से ले जाने के बजाय स्कूटर पर रखकर ले जाया गया।
इंटरनेट मीडिया पर जारी वीडियो में कुछ युवक सड़क पर स्कूटर के आगे मगरमच्छ को रखकर ले जाते दिखाई दे रहे हैं।
वन विभाग के पास वन्यजीवों के रेस्क्यू और सुरक्षित परिवहन के लिए विशेष वाहन और जरूरी संसाधन उपलब्ध रहते हैं। इसके बावजूद संरक्षित वन्यजीव को खुले स्कूटर पर ले जाने की शिकायत जबलपुर वनमंडलाधिकारी से की गई है। जिस पर सुरक्षा मानकों पर सवाल उठाए गए। इस दौरान मगरमच्छ के साथ सड़क पर चलने वाले लोगों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती थी।
मामले की जानकारी मिलने पर जबलपुर वनमंडलाधिकारी पुनीत सोनकर ने इसे गंभीरता से लिया है। उन्होंने पूरे घटनाक्रम की आधिकारिक जांच कराने और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की बात कही है। वन विभाग यह पता लगा रहा है कि रेस्क्यू के बाद मगरमच्छ को दोपहिया वाहन से किसके निर्देश पर और क्यों ले जाया गया।
परियट नदी मगरमच्छों की शरणस्थली बन चुकी है। स्थानीय स्तर पर यहां करीब 800 से ज्यादा मगरमच्छ होने का अनुमान है। बारिश के दौरान नदी, तालाब और जलाशयों का जलस्तर बढ़ने से मगरमच्छों की गतिविधियां भी बढ़ गई हैं। पानी और भोजन की तलाश में वे आसपास के गांवों और खेतों तक पहुंच रहे हैं।
वन्य प्राणी विशेषज्ञ शंकरेंद्र नाथ बताते हैं कि मटामर, रिमझा, सोनपुर, खमरिया व आस-पास के गांव में अक्सर मगरमच्छ दिखाई देते हैं। नदी और तालाब के आसपास रहने वाले ग्रामीणों को खेतों में जाने और जलस्रोतों के नजदीक काम करने में डर बना रहता है।
बारिश में मगरमच्छ अधिक सक्रिय होते हैं। ऐसे में जलभराव वाले क्षेत्रों और नदी-तालाबों के आसपास ग्रामीणों को सतर्क रहने की जरूरत है।
मगरमच्छ का रेस्क्यू कर स्कूटर पर ले जाने का मामला संज्ञान में आया है। मगरमच्छ को दोपहिया वाहन से किसके निर्देश पर और क्यों ले जाया गया जानकारी ली जाकर उचित कार्रवाई की जाएगी।
-पुनीत सोनकर, वनमंडलाधिकारी, जबलपुर
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