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फर्जी अंकसूची से 10 साल नौकरी करने पर 3 साल की कैद की सजा, कोर्ट का फैसला आने पर मुंह छिपाता नजर आया छात्रावास अधीक्षक

जांच में सामने आया कि आरोपित काजले ने नौकरी पाने के लिए स्नातक की फर्जी अंकसूची तैयार करवाई थी और इसी के आधार पर करीब दस वर्षों तक खरगोन जिले में शासक...और पढ़ें

By Geete GovindEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Sat, 25 Apr 2026 08:35:16 PM (IST)Updated Date: Sat, 25 Apr 2026 08:37:37 PM (IST)
फर्जी अंकसूची से 10 साल नौकरी करने पर 3 साल की कैद की सजा, कोर्ट का फैसला आने पर मुंह छिपाता नजर आया छात्रावास अधीक्षक
फोटो- कोर्ट का फैसला आने पर आरोपित मोहन सिंह काजले मुंह छिपाता नजर आया।

HighLights

  1. आरोपित काजले ने नौकरी पाने के लिए स्नातक की फर्जी अंकसूची तैयार करवाई थी।
  2. इसी के आधार पर करीब दस वर्षों तक खरगोन जिले में शासकीय सेवा करता रहा।
  3. सिटी कोतवाली पुलिस ने दिसंबर 2020 में आरोपित के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया था।

नईदुनिया प्रतिनिधि, खंडवा। जिला न्यायालय ने फर्जी अंकसूची के आधार पर शासकीय नौकरी हासिल करने के एक प्रकरण में शनिवार को फैसला सुनाते हुए दोषी छात्रावास अधीक्षक मोहन सिंह काजले को तीन साल का कारावास और 27 हजार रुपये का अर्थदंड दिया है। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश अनिल चौधरी ने यह फैसला सुनाया है।

मामले में सहआरोपी सास भगवती बाई को भी दोषी मानते हुए छह माह के कारावास और दो हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई है।

जांच में सामने आया कि आरोपित काजले ने नौकरी पाने के लिए स्नातक की फर्जी अंकसूची तैयार करवाई थी और इसी के आधार पर करीब दस वर्षों तक खरगोन जिले में शासकीय सेवा करता रहा।

सिटी कोतवाली पुलिस ने दिसंबर 2020 में आरोपित के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया था। मामले में सुनवाई के बाद 25 अप्रैल 2026 को न्यायालय ने आरोपित को दोषी करार दिया। प्रकरण में शासन की ओर से अपर लोक अभियोजक अश्विनी भाटे ने पैरवी की।