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ओंकारेश्वर में पहली बार बना भारत माता मंदिर, दीवाली पर मार्कंडेय संन्यास आश्रम में किया गया लोकार्पण

धर्म, अध्यात्म और राष्ट्रभक्ति की त्रिवेणी के रूप में प्रसिद्ध तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में रविवार को एक और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया।

By Manish KareEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sun, 08 Nov 2026 11:00:40 PM (IST)Updated Date: Sun, 08 Nov 2026 11:00:40 PM (IST)
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ओंकारेश्वर में पहली बार बना भारत माता मंदिर, दीवाली पर मार्कंडेय संन्यास आश्रम में किया गया लोकार्पण
ओंकारेश्वर में भारत माता मंदिर का लोकार्पण।

HighLights

  1. ओंकारेश्वर में भारत माता मंदिर का लोकार्पण
  2. RSS सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले रहे मौजूद
  3. आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हुई धर्मनगरी

नईदुनिया न्यूज, ओंकारेश्वर। धर्म, अध्यात्म और राष्ट्रभक्ति की त्रिवेणी के रूप में प्रसिद्ध तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में रविवार को एक और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया। मां नर्मदा के तट स्थित मार्कंडेय संन्यास आश्रम में नवनिर्मित भारत माता मंदिर का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने लोकार्पण किया। इस अवसर पर पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा और राष्ट्रभक्ति के भाव से ओतप्रोत नजर आया।

ओंकारेश्वर के दर्शन के बाद किया मंदिर का लोकार्पण

ओंकारेश्वर पहुंचने पर अरुण दत्तात्रेय होसबाले ने सर्वप्रथम ज्योतिर्लिंग भगवान ओंकारेश्वर के दर्शन कर पूजन-अर्चन किया। इसके बाद ओंकार पर्वत पहुंचकर आदि गुरु शंकराचार्य की प्रतिमा के दर्शन किए। तत्पश्चात वे मार्कंडेय संन्यास आश्रम पहुंचे, जहां भारत माता मंदिर का लोकार्पण किया।


नर्मदा तट पर आध्यात्मिक चेतना और राष्ट्रीय भावना का संगम

इस अवसर पर दत्तात्रय ने कहा कि मां नर्मदा के पावन तट पर भारत माता मंदिर का शुभारंभ होना अत्यंत प्रसन्नता और गौरव का विषय है। ओंकारेश्वर की धरती आदि गुरु शंकराचार्य की तपस्या और साधना से जुड़ी हुई है। नर्मदा के एक ओर शंकराचार्य की प्रतिमा और दूसरी ओर भारत माता का मंदिर स्थापित होना आध्यात्मिक चेतना और राष्ट्रीय भावना के अद्भुत संगम को दर्शाता है।

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ऋषि-मुनियों की तपस्या से बना है भारत

उन्होंने कहा कि भारत केवल भौगोलिक सीमाओं से बना देश नहीं, बल्कि ऋषि-मुनियों, ब्रह्मर्षियों और राजर्षियों की तपस्या, ज्ञान और संस्कारों से निर्मित महान राष्ट्र है। हमारे महापुरुषों ने अपनी आध्यात्मिक चेतना और विचारों से भारत को विश्व में विशिष्ट पहचान दिलाई है। भारत माता की स्वतंत्रता और रक्षा के लिए असंख्य वीरों ने अपना सर्वस्व न्योछावर किया है।

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