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वर्षा की बूंदों को सहेजने के प्रयास में खंडवा देश में दूसरे नंबर पर, नगर निगम को राष्ट्रपति के हाथों मिलेगा पुरस्कार

नगरीय निकायों के बीच देशभर में हुई स्पर्धा में खंडवा नगर निगम ने दूसरा स्थान प्राप्त किया है। नगर निगम ने जल संचय के लिए सबसे अधिक 20 हजार 490 संरचनाए...और पढ़ें

By Geete GovindEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Tue, 02 Jun 2026 07:54:23 AM (IST)Updated Date: Tue, 02 Jun 2026 07:54:23 AM (IST)
वर्षा की बूंदों को सहेजने के प्रयास में खंडवा देश में दूसरे नंबर पर, नगर निगम को राष्ट्रपति के हाथों मिलेगा पुरस्कार
नगर निगम द्वारा 130 स्थानों पर सोक्ता पिट का निर्माण किया गया है। (नईदुनिया प्रतिनिधि)

HighLights

  1. नगर निगम ने जल संचय के लिए सबसे अधिक 20 हजार 490 संरचनाएं तैयार कर यह उपलब्धि हासिल की है
  2. वर्षा की बूंदों को बचाने के लिए नगर निगम द्वारा करीब एक महीने से किए जा रहे प्रयास रंग लाए हैं
  3. नगर निगम को दो करोड़ रुपये की राशि और राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा

नईदुनिया प्रतिनिधि, खंडवा। जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत नगरीय निकायों के बीच देशभर में हुई स्पर्धा में खंडवा नगर निगम ने दूसरा स्थान प्राप्त किया है। 14 अप्रैल से शुरू हुई इस स्पर्धा में नगर निगम ने जल संचय के लिए सबसे अधिक 20 हजार 490 संरचनाएं तैयार कर यह उपलब्धि हासिल की है।

वर्षा की बूंदों को बचाने के लिए नगर निगम द्वारा करीब एक महीने से किए जा रहे प्रयास रंग लाए हैं। देशभर के नगरीय निकायों में खंडवा का नाम दूसरे नंबर पर आया है। इस उपलब्धि पर नगर निगम को दो करोड़ रुपये की राशि और राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।


हालांकि इससे पूर्व निगम द्वारा किए गए कार्यों का जायजा लेने के लिए केंद्रीय टीम खंडवा आएगी। निगमायुक्त प्रियंका राजावत के नेतृत्व में नगर निगम के 29 अधिकारियों की टीम ने रात और दिन मेहनत कर शहर के अलग-अलग 130 स्थानों पर सोक्ता पिट का निर्माण कराया। सोक्ता पिट निर्माण के साथ ही इन्हें चूने की लकीरों से चिन्हित कर मोबाइल से फोटो लेकर पोर्टल पर अपलोड किए गए।

आदर्शनगर, हिंदू बाल सेवा सदन के पास, नागचून तालाब क्षेत्र, कृषि महाविद्यालय, मिट्टी परीक्षण केंद्र, नवकार नगर, आइटीआइ, केंद्रीय विद्यालय, एनवीडीए कालोनी और ट्रेंचिंग ग्राउंड सहित अन्य क्षेत्रों में तीन से चार फीट गहरे सोक्ता पिट बनाए गए हैं। 14 अप्रैल से जल गंगा संवर्धन अभियान की शुरुआत हुई थी। इस अभियान में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सहित उन अन्य संरचनाओं को भी शामिल किया गया है जिन्हें निगम द्वारा वर्षा का जल संचय करने के लिए तैयार किया है।

क्या होता है सोक्ता पिट

सोक्ता पिट जमीन में खोदा गया एक ऐसा गड्ढा होता है, जिसका इस्तेमाल वर्षा के पानी को सुरक्षित रूप से जमीन के अंदर सोखने के लिए किया जाता है। इसे ''सोख गड्ढा'' भी कहते हैं। यह गड्ढा पानी के सही प्रबंधन, जल संरक्षण और आसपास स्वच्छता बनाए रखने में मदद करता है। इस गड्ढे की दीवारों और तल को पक्का नहीं किया जाता, बल्कि छिद्रयुक्त रखा जाता है। इसे पत्थरों, बजरी और रेत की परतों से भरा जाता है। जब वर्षा का पानी इस गड्ढे में जाता है तो पत्थर और रेत उसे छानने (फिल्टर) का काम करते हैं। इसके बाद पानी धीरे-धीरे रिसकर जमीन के अंदर चला जाता है, जिससे भूजल का स्तर बढ़ता है।

20 हजार 490 संरचनाओं का निर्माण किया है

जल गंगा संवर्धन स्पर्धा में देशभर में खंडवा ने दूसरा स्थान प्राप्त किया है। निगम अधिकारी और कर्मचारियों की मेहनत से 20 हजार 490 संरचनाओं का निर्माण हमने किया है। वेस्ट जोन लेवल की स्पर्धा में नगर निगम खंडवा प्रथम स्थान पर है। जल्द ही केंद्रीय टीम इन संरचनाओं का वेरिफिकेशन करने आएगी। - प्रियंका राजावत, निगमायुक्त

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