
नईदुनिया प्रतिनिधि, खंडवा। श्रीधूनीवाले दादाजी दरबार में सौ करोड़ रुपये की लागत से मार्बल के मंदिर निर्माण के लिए गुरुवार को नींव का पहला पत्थर रखा गया। श्रीदादाजी धूनीवाले की जय और नर्मदा माई के जयकारे लगाते हुए भक्तों ने नींव का पत्थर रखा और इसके बाद पत्थरों की जुड़ाई का काम शुरू हो गया। मंदिर निर्माण के लिए पहले चरण में लगने वाले 56 खंभों के बीच 11 से 13 फीट की दूरी रहेगी।
श्रीदादाजी दरबार में गुरुवार को सर्वेयर टीम द्वारा खंभों के लिए मार्किंग की गई। जिस स्थान पर सीमेंटीकरण का काम हो चुका है, वहां मार्किंग कर 56 खंभों का बेस तैयार करने के लिए पाइंट निर्धारित किए गए। दोपहर तीन बजे से यह काम शुरू हुआ जो शाम करीब पांच बजे तक चला।
शाम सात बजे यहां मंदिर ट्रस्टी सुभाष नागौरी, शांतनु दीक्षित, श्रीदादाजी पटेल सेवा समिति के मदन भाऊ ठाकरे, मंदिर निर्माण समिति सदस्य सतीष कोटवाले, गणेश कनाड़े सहित अन्य भक्तों ने नींव निर्माण के लिए पत्थर रखा।
गुरुपूर्णिमा से पहले श्रीदादाजी दरबार में फाउंडेशन निर्माण का पहला चरण पूरा करने का लक्ष्य मंदिर निर्माण समिति ने रखा है। नींव का पहला पत्थर लगने के साथ ही अब लक्ष्य को पूरा करने के लिए श्रीदादाजी दरबार में रात और दिन काम किया जाएगा। इसके लिए 80 से अधिक मजदूरों की टीम लगेगी। बड़े दादाजी, छोटे दादाजी मंदिर के पीछे गुरुवार को सीमेंटीकरण का काम चलता रहा।
इधर मां नर्मदा मंदिर के लिए की गई खोदाई स्थल पर सीमेंटीकरण पूरा होने के बाद यहां खंभों का बेस बनाने के लिए अलग-अलग पाइंट बनाए गए। विपिन मिश्रा, ओमप्रकाश कोचले, सतीष कोटवाले मंदिर समिति सदस्य गणेश कनाड़े सहित अन्य मौजूद रहे। पहले चरण में लगने वाले 56 खभों के बीच में 11 से 13 फीट तक की दूरी रहेगी।
इसके अलावा बेसाल्ट के पत्थरों से तैयार होने वाला खंभों का बेस पांच फीट ऊंचा और पांच फीट चौड़ा रहेगा। पहले चरण में 56 खंभों में 20 नर्मदा माई के मंदिर की ओर बनेंगे। जबकि 36 खंभे बड़े दादाजी और छोटे दादाजी मंदिर के पीछे की ओर बनेंगे। सर्वेयरों ने अलग-अलग जगह पर टेप से नापकर पाइंट बनाए। पाइंट तैयार होने के बाद किसी तरह की गलतफहमी ना हो इसके लिए सरिये लगाकर इन पर पीला रंग पोता गया है।
नींव निर्माण के लिए पत्थरों की जुड़ाई कर कटऑफ दीवार भी बनाई जाएगी। यह दीवार प्लींथ की ऊंचाई तक ही रहेगी। इसकी मोटाई करीब ढाई फीट तक रहेगी। यह दीवार निर्माणाधीन नर्मदा माई मंदिर से छोटे दादाजी मंदिर तक करीब 132 फीट लंबी होगी। दीवार को बेसाल्ट पत्थर की जुड़ाई करके बनाया जाएगा। इस दीवार से यह फायदा होगा कि खोदाई के दौरान होने वाले कंपन आगे नहीं बढ़ेगा और मंदिर सुरक्षित रहेंगे।
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