
नईदुनिया प्रतिनिधि, खंडवा। यूजीसी कानून के बाद छिड़ी बहस के बीच गरीब परिवार की एक बेटी सोनाली प्रजापति मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री से सार्वजनिक रूप से खुलकर सवाल किया- पढ़ाई में जाति के आधार पर भेदभाव क्यों किया जा रहा है? उसने मंत्री से पूछा- क्यों सबका वोट लेने के बाद भी सरकार सभी वर्गों के गरीब परिवारों के छात्र-छात्राओं को पढ़ाई में वो सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा रही, जिनकी उन्हें आवश्यकता है? जबकि एक जाति-वर्ग की छात्राओं और छात्रों को ही सुविधाएं दी जाती हैं, चाहें उन्हें उसकी जरूरत हो या नहीं। यह बेटी ओबीसी (पिछड़ा वर्ग) परिवार से आती है। सवाल उठाकर वह चर्चा में आ गई है।
हालांकि उसके सवाल पर मंत्री ही नहीं, उस समय मौजूद सारे लोग निरुत्तर हो गए, लेकिन उसका यह सवाल जातिगत भेदभाव को बढ़ावा देने वाली सत्ता-व्यवस्था के बनाए नियमों को लेकर छिड़ी बहस को और आगे बढ़ाता है। मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में स्थित पंडित माखनलाल चतुर्वेदी महाविद्यालय में शुक्रवार को बीए तृतीय वर्ष की छात्रा सोनाली ने यह सवाल छात्रोत्सव कार्यक्रम में सार्वजनिक तौर पर उठाया।
मुख्य अतिथि जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह ने मंच घोषणा की कि एससी-एसटी छात्र-छात्राओं के लिए सरकार की ओर से बस, छात्रावास, आवास भत्ता, नीट और पीएससी के लिए नि:शुल्क कोचिंग की व्यवस्था की जाएगी, तो सोनाली आगे आई और बोली- मैं अपनी बात रखना चाहती हूं।
इसके बाद सोनाली ने मंच पर मंत्री से खुलकर सवाल करते हुए कहा- 'कॉलेज सभी का है। हम भी कॉलेज के बच्चे हैं। पढ़ाई का अधिकार सभी को समान रूप से मिलना चाहिए, क्योंकि सभी वर्गों के बहुत सारे विद्यार्थी आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आते हैं और उन्हें भी मदद की जरूरत है। ऐसे में पढ़ाई के लिए सरकारी सुविधाओं का वितरण जाति के आधार पर क्यों किया जा रहा है? यह उचित नहीं है।' छात्रा के सवाल पर मंत्री विजय शाह कोई जवाब नहीं दे पाए, सिर्फ यही आश्वासन दिया कि वह इस मुद्दे को मुख्यमंत्री के समक्ष रखेंगे।
शनिवार को मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव जब खंडवा के पंधाना में पहुंचे तो सोनाली प्रजापति कुछ अन्य छात्राओं के साथ उनसे मिली और वही सवाल किया। कहा कि कॉलेज में सभी को पढ़ाई का समान अधिकार मिलना चाहिए। इस पर मुख्यमंत्री ने इस पर विचार करने का आश्वासन दिया। सोनाली के साथ काजल हिरवे, रक्षा प्रजापति, निकिता पटेल, प्रतीक्षा झंवर, दीपिका सोनकामले छात्राएं भी रहीं। महाविद्यालय के प्राचार्य डा. विनय जैन ने बताया कि छात्राओं से मुलाकात के लिए समय मांगा गया था।
खंडवा जिले के सिंघाड़ तलाई क्षेत्र में रहने वाली सोनाली के पिता लक्ष्मण प्रजापति प्राइवेट नौकरी करते हैं। मां गृहिणी है। शनिवार को नईदुनिया से सोनाली ने कहा कि मैंने यह सवाल इसलिए उठाया, क्योंकि कालेज में एससी-एसटी वर्ग की छात्राओं को किताबें और स्टेशनरी उपलब्ध कराई जा रही हैं, जबकि ओबीसी और सामान्य वर्ग की छात्राएं इन सुविधाओं से वंचित हैं। उसने कहा कि मेरे जैसी बहुत सारी छात्राएं ऐसी हैं, जिनके पिता किताबें खरीदकर देने में आर्थिक रूप से सक्षम नहीं हैं। ऐसे में, हम पढ़ाई से वंचित रह जाएंगे, जबकि किताबें पाने वाली एससी-एसटी वर्ग की कई छात्राएं ऐसी हैं, जिनके परिवार आर्थिक रूप से सक्षम हैं।
सोनाली ने कहा कि मेरा सवाल पूरी तरह से जायज है। शिक्षा और नौकरी के लिए अधिकारों में समानता आवश्यक है। जातिगत नहीं बल्कि आर्थिक आधार पर सरकारी सुविधाएं इसलिए दी जानी चाहिए, क्योंकि हर वर्ग में लोग पिछड़े हैं। सरकार को इसमें जातिगत भेदभाव नहीं करना चाहिए। जाति आधार पर सुविधाएं देने से तो जिन्हें जरूरत नहीं, वे भी लाभ पा जाते हैं और जिन्हें जरूरत है, वे वंचित रहने से पिछड़ जाते हैं।
सोनाली ने कहा कि यदि नियम और व्यवस्था में बदलाव नहीं किया गया तो समाज से कभी पिछड़ापन खत्म नहीं होगा। एक और बड़ा वर्ग पिछड़ता जाएगा, जो भेदभाव को बढ़ावा देगा। सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।