
नईदुनिया प्रतिनिधि, खरगोन: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने मध्यप्रदेश के खरगोन जिले में आयोजित एक कार्यक्रम में राष्ट्र और समाज की भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारत पहले से ही हिंदू राष्ट्र है, इसकी अलग से घोषणा की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने समाज की जिम्मेदारी, नागरिक चेतना और संस्कारों को राष्ट्र निर्माण की मूल आधारशिला बताया।
कार्यक्रम और स्थान
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने बुधवार को खरगोन जिले की कसरावद तहसील स्थित ग्राम लेपा पुनर्वास के नर्मदालय आश्रम में विचार प्रेरक कार्यक्रम को संबोधित किया। यह कार्यक्रम श्री रामकृष्ण विश्व सद्भावना निकेतन के तत्वावधान में आयोजित किया गया था।
हिंदू राष्ट्र पर बयान
डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि कई स्थानों पर लोग उनसे भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग करते हैं, लेकिन उनका मानना है कि जो पहले से है, उसकी घोषणा की आवश्यकता नहीं होती। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे सूर्य पूर्व से ही उदय होता है, उसके लिए किसी घोषणा की जरूरत नहीं पड़ती।
समाज और नागरिकों की भूमिका
उन्होंने कहा कि शासन तंत्र और राजा आते-जाते रहते हैं, लेकिन समाज स्थायी होता है। राष्ट्र की दिशा तय करने की जिम्मेदारी नागरिकों की होती है। यदि समाज जागरूक, जिम्मेदार और संस्कारित बनेगा, तो राष्ट्र अपने आप सशक्त होगा। किसी देश की पहचान केवल शासन व्यवस्था से नहीं, बल्कि वहां रहने वाले लोगों के आचरण और सामाजिक दायित्वों से बनती है।
महापुरुषों का उदाहरण
अपने उद्बोधन में डॉ. भागवत ने टंट्या मामा और गाडगे महाराज का उल्लेख करते हुए कहा कि इन महापुरुषों ने कोई औपचारिक शिक्षा नहीं ली थी, फिर भी समाज में उन्हें विशेष सम्मान प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति के भीतर दैवीय गुण होते हैं, जिन्हें पहचानकर विकसित करना आवश्यक है।
नर्मदालय आश्रम की सराहना
डॉ. भागवत ने नर्मदालय आश्रम द्वारा शिक्षा और आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की प्रशंसा की और इसे समाज के लिए प्रेरणास्पद मॉडल बताया। कार्यक्रम में लगभग 300 अतिथि शामिल हुए, जिनमें पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, पद्मश्री महेश शर्मा और नर्मदा न्यास के अध्यक्ष नितिन कर्माकर प्रमुख रूप से उपस्थित थे।
नर्मदालय आश्रम की स्थापना की कहानी
नर्मदालय आश्रम की स्थापना वर्ष 2009 में एक संयोग के चलते हुई थी। इसकी संस्थापिका भारती ठाकुर दीदी, जो अब प्रवृत्तिका विशुद्धानंदजी के नाम से जानी जाती हैं, ने रक्षा मंत्रालय की नौकरी छोड़कर आश्रम की नींव रखी।
शिक्षा से जुड़ा संकल्प
नर्मदा परिक्रमा के दौरान स्वास्थ्य खराब होने पर वे लेपा गांव में रुकी थीं। बच्चों से बातचीत के दौरान उनकी शिक्षा की स्थिति देखकर उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करने का संकल्प लिया। पहले दिन केवल 14 शाला त्यागी बच्चे जुड़े थे, जबकि आज यहां 800 बच्चे अध्ययन कर रहे हैं।
आश्रम की गतिविधियां
नर्मदालय (निमाड़ अभ्युदय रूरल मैनेजमेंट एंड डेवलपमेंट एसोसिएशन) आश्रम में अनेक सामाजिक गतिविधियां संचालित की जाती हैं। परिसर में श्री रामकृष्ण विश्व सद्भावना निकेतन मंदिर का निर्माण किया गया है, जिसका उद्घाटन 15 से 17 जनवरी तक चले अनुष्ठान के दौरान हुआ। यहां स्वामी रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद की प्रतिमाएं स्थापित हैं।