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कान्हा के बाघ के लिए दुआओं का दौर: सीडीवी संक्रमण के साथ रक्त रोग से जूझ रहा 3 साल का शावक, डॉक्टरों की स्पेशल टीम कर रही इलाज

कान्हा टाइगर रिजर्व के किसली रेंज स्थित संदूकखोल क्षेत्र में तीन वर्षीय बाघ की जांच की गई है। 2 जून को जांच में पुष्टि हुई है कि बाघ कैनाइन डिस्टेंपर ...और पढ़ें

By Shahank ChoubeyEdited By: bhupendra Singh Rajput
Publish Date: Sun, 21 Jun 2026 09:14:54 AM (IST)Updated Date: Sun, 21 Jun 2026 09:15:54 AM (IST)
कान्हा के बाघ के लिए दुआओं का दौर: सीडीवी संक्रमण के साथ रक्त रोग से जूझ रहा 3 साल का शावक, डॉक्टरों की स्पेशल टीम कर रही इलाज
फाइल फोटो।

HighLights

  1. कान्हा के तीन वर्षीय बाघ में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) और रक्त संबंधी बीमारी की पुष्टि
  2. मुक्की क्वारंटाइन सेंटर में उपचार जारी, हालत में मामूली सुधार लेकिन भोजन नहीं कर पा रहा
  3. कान्हा में पहले भी सीडीवी से छह बाघों की मौत हो चुकी है, विशेषज्ञ लगातार निगरानी कर रहे हैं

नईदुनिया प्रतिनिधि, मंडला। कान्हा टाइगर रिजर्व के किसली रेंज के संदूकखोल क्षेत्र में दो जून को असामान्य व्यवहार करते पाया गया तीन वर्षीय बाघ कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) से संक्रमित होने के साथ ही रक्त संबंधी बीमारी से भी पीड़ित है।

स्कूल ऑफ वाइल्ड लाइफ फारेंसिंक एंड हेल्थ, जबलपुर की जांच रिपोर्ट में सीडीवी से संक्रमित होने की पुष्टि के बाद उसका इलाज मुक्की के क्वारंटाइन सेंटर में चल रहा है। उसकी 24 घंटे निगरानी की जा रही है। अब उसकी हालत में थोड़ा सुधार नजर आ रहा है। वह अब स्वयं उठकर खड़ा हो पा रहा है।


सीडीवी संक्रमण से बाघ के दिमाग पर असर

यह बाघ पहले की अपेक्षा कमजोर हो चुका है। वह कब तक स्वस्थ हो पाएगा, इस बारे में कुछ स्पष्ट नहीं है। सीडीवी का असर बाघ के दिमाग पर भी पड़ा है, जिससे उसके सोचने-समझने की शक्ति भी प्रभावित हुई है। यदि वह ठीक भी हो गया तो इस लायक नहीं रह पाएगा कि खुले जंगल में छोड़ा जा सके। उसे निगरानी में ही रखना होगा।

गौरतलब है कि कान्हा में अमाही बाघिन टी-141 और उसके चार शावकों की मौत सीडीवी से हुई है। इसके बाद महावीर बाघ की भी सीडीवी की चपेट में आकर मौत हो चुकी है। पीड़ित बाघ के इलाज के लिए मप्र के पशु चिकित्सकों की समय-समय पर सेवाएं ली जा रही हैं। वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से भी चिकित्सकों से सलाह ली जा रही है।

यह भी पढ़ें- कान्हा में बाघों पर मंडराया कैनाइन डिस्टेंपर वायरस का खतरा, पांच की मौत के बाद अलर्ट पर एनटीसीए

डॉक्टर कर रहे नियमित निगरानी

स्कूल ऑफ वाइल्ड लाइफ फारेसिंक एंड हेल्थ, जबलपुर के दो डॉक्टर नियमित रूप से उसकी निगरानी में लगाए गए हैं। एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. काजल से भी परामर्श लिया जा रहा है। वन विहार भोपाल के विशेषज्ञ पशु चिकित्सक डा. अतुल गुप्ता भी यहां आकर बाघ के स्वास्थ्य की जानकारी ले चुके हैं। वाइल्डलाइफ कंजरवेशन ट्रस्ट (डब्ल्यूसीटी) से विशेषज्ञ डॉ. प्रशांत देशमुख ने भी पीड़ित बाघ का परीक्षण किया है और सलाह दी है।

पीड़ित बाघ की स्थिति में पहले से थोड़ा सुधार आया है। वह स्वयं से उठ पा रहा है, लेकिन वह खा नहीं खा पा रहा। विशेषज्ञ चिकित्सकों की मदद ली जा रही है। सीसीटीवी की मदद से 24 घंटे निगरानी की जा रही है। - पीके वर्मा, डिप्टी डायरेक्टर, कान्हा टाइगर रिजर्व, मंडला।