
नईदुनिया प्रतिनिधि, मंडला। जनपद पंचायत मोहगांव अंतर्गत ग्राम पंचायत बिलगांव स्थित पीएम श्री हायर सेकेंडरी स्कूल में शिक्षकों की कमी है। विद्यालय में हायर सेकेंडरी की कक्षाएं हाई स्कूल के शिक्षकों के भरोसे संचालित होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। खासकर 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को नियमित शिक्षक या अतिथि शिक्षक नहीं मिलने से बोर्ड परीक्षा की तैयारी को लेकर चिंता बढ़ गई है।
समस्या का समाधान नहीं होने पर ग्राम पंचायत ने तीन दिन के भीतर आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है। ग्राम पंचायत बिलगांव की ओर से कलेक्टर मंडला को ज्ञापन सौंपकर विद्यालय में स्वीकृत पदों के अनुरूप नियमित शिक्षक अथवा अतिथि शिक्षकों की तत्काल व्यवस्था करने की मांग की गई है। ज्ञापन सौंपने के दौरान पंचायत के सरपंच, क्षेत्रीय जनपद सदस्य और अभिभावक भी मौजूद रहे।
पंचायत ने बताया कि लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल के आदेश के तहत पीएम श्री योजना में पीएम श्री हाई स्कूल बिलगांव का उन्नयन हायर सेकेंडरी स्कूल के रूप में किया गया है। इसके बाद 11वीं और 12वीं की कक्षाएं शुरू तो कर दी गईं, लेकिन आज तक इन कक्षाओं के लिए पर्याप्त शिक्षकों की व्यवस्था नहीं हो सकी है। विज्ञान और कला संकाय के शिक्षक भी उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में हायर सेकेंडरी की कक्षाएं लगभग शिक्षकविहीन स्थिति में संचालित हो रही हैं।
सबसे ज्यादा चिंता 12वीं के विद्यार्थियों को लेकर है। आगामी बोर्ड परीक्षा को देखते हुए विद्यार्थी नियमित पढ़ाई और विषयवार मार्गदर्शन नहीं मिलने से परेशान हैं। वहीं 7 सितंबर से तिमाही परीक्षाएं प्रस्तावित हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि यदि समय रहते शिक्षकों की व्यवस्था नहीं हुई तो परीक्षा की तैयारी करना मुश्किल होगा। पंचायत ने यह भी बताया कि समस्या का समाधान नहीं होने पर विद्यार्थी तिमाही परीक्षा के बहिष्कार का निर्णय ले सकते हैं।
ग्रामीणों के अनुसार शिक्षकों की कमी के संबंध में करीब 15 दिन पहले जनसुनवाई के माध्यम से प्रशासन को अवगत कराया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं हुआ। इसके बाद पंचायत प्रतिनिधियों, विद्यार्थियों और अभिभावकों ने जिला मुख्यालय पहुंचकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।
पंचायत ने प्रशासन से छात्रहित में तत्काल शिक्षक एवं अतिथि शिक्षकों की व्यवस्था करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि तीन दिवस के भीतर समस्या का समाधान नहीं हुआ तो ग्रामीण और पंचायत प्रतिनिधि आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
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