नईदुनिया प्रतिनिधि, मुरैना। कोटा से इटावा के बीच 404 किमी लंबाई का अटल प्रोग्रेस-वे अब पुराने रूट अलाइनमेंट पर ही बनाया जाएगा। राज्य शासन से ऐसा संकेत मिलने के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने मुरैना जिले के 90 गांव की पूर्व में चिह्नित की गई जमीन का सत्यापन कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
ऐसा इसलिए किया जा रहा है, ताकि तीन साल के गैप के दौरान किसानों ने अधिग्रहण के लिए चिह्नित जमीनों को कहीं बेच तो नहीं दिया। सत्यापन के बाद जमीन अधिग्रहण के लिए किसानों के नाम उनके गांव व रकबा का प्रकाशन किया जाएगा।
दावे-आपत्ति के बाद किसानों के खातों में पैसा होगा ट्रांसफर
दावे-आपत्ति के बाद किसानों के बैंक खातों में उनकी जमीन का पैसा ट्रांसफर किया जाएगा। अटल प्रोग्रेस-वे का पुराना रूट अलाइनमेंट 90 गांव से होकर गुजरेगा। इसमें सबलगढ़ के 11 गांव, जौरा के 29 गांव, मुरैना के 15 गांव, अंबाह के 10 गांव, पोरसा के 25 गांव की जमीन शामिल हैं।
छह साल पहले 2020 में जब इस प्रोजेक्ट का सर्वे किया गया तो किसानों की जमीन का अधिग्रहण किए जाने के लिए उनकी सूची तैयार की गई थी। भूमि अधिग्रहण होता उससे पहले भारत सरकार ने अटल प्रोग्रेस-वे का रूट अलाइनमेंट बदल दिया।
नए रूट अलाइनमेंट में किसानों की जमीन अधिक जा रही थी
नए रूट अलाइनमेंट को लेकर किसानों में असंतोष पनप गया, क्योंकि नए रूट अलाइनमेंट में किसानों की जमीन अधिक जा रही थी। सबलगढ़ से लेकर पोरसा के बीच किसानों के कड़े विरोध को देखते हुए पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई को अप्रैल 2023 में तत्काल प्रभाव से रुकवा दिया।
तीन साल तक यह प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में रहने के बाद फिर से धरातल पर आ गया है। केंद्र सरकार के भूतल परिवहन मंत्रालय की पहल पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 23 हजार 645 करोड़ रुपये लागत के अटल प्रोग्रेस-वे का निर्माण पुराने रूट अलाइनमेंट पर कराने के आदेश जारी किए हैं।
कलेक्टर गाइडलाइन का दो गुना मुआवजा देगा
इसमें अभी तक राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण किसानों को उनकी जमीन लेने के बदले कलेक्टर गाइडलाइन का दो गुना मुआवजा देगा। पुराने रूट अलाइनमेंट में कम जाएगी किसानों की जमीन अटल प्रोग्रेस-वे का निर्माण पुराने रूट अलाइनमेंट पर कराए जाने की दशा में 90 गांव के 2089 किसानों की महज 488.01 हेक्टेयर जमीन का उपयोग होगा।
12 हजार किसानों की 450 हेक्टेयर से अधिक जमीन बच रही
वहीं, यदि कहीं नए रूट अलाइनमेंट पर अटल प्रोग्रेस-वे का निर्माण कराया जाना होता तो 96 गांव के 14137 किसानों की 935.3 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण की जाती। अंतर साफ स्पष्ट है कि पुराने रूट अलाइनमेंट पर अटल प्रोग्रेस-वे बनाने से 12 हजार किसानों की 450 हेक्टेयर से अधिक जमीन बच रही है जिस पर वह आजीवन खेती करते रहेंगे।
अब फिर से सड़कों पर उतरेंगे किसान
अटल प्रोग्रेस-वे के लिए जमीन अधिग्रहण को लेकर मप्र किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष अशोक तिवारी का कहना है कि किसानों को उनकी जमीन का चार गुना मुआवजा देने के आदेश मुख्यमंत्री को तत्काल प्रभाव से करने चाहिए। किसान दो गुना मुआवजा में तो अपनी जमीन इस प्रोजेक्ट के लिए कतई नहीं देंगे। आंदोलन पहले भी हुआ था और अब फिर से सड़कों पर उतरेंगे किसान।
मध्य प्रदेश में एंट्री श्योपुर से होगी
कोटा से 78 किलोमीटर दूरी के बाद प्रोग्रेस-वे की मप्र में एंट्री श्योपुर से होगी। श्योपुर के 48 गांव से ये हाइवे गुजरेगा। यहां के छीताखेड़ी, जालेरा, जुवाड़, सिरसोद, जैनी समेत 26 गांव ऐसे हैं, जो कि बीहड़ क्षेत्र में मौजूद हैं या उससे बिल्कुल सटे हुए हैं। इन क्षेत्रों में अच्छे पहुंच मार्ग भी अभी नहीं हैं।
43 गांव चंबल के बीहड़ क्षेत्र से जुड़े हैं
श्योपुर के बाद मुरैना के सबलगढ़, जौरा, मुरैना, अंबाह, पोरसा से होते हुए 90 गांव से ये हाईवे जुड़ेगा। जिनमें 43 गांव ऐसे हैं जो कि चंबल के बीहड़ क्षेत्र से जुड़े हैं या उसमें ही मौजूद हैं। यहां गढुला, बंथर, अटार, गरजा, डंडोली, गूंज, रछेड़, धोर्रा समेत अन्य गांव बीहड़ के कारण विकास की मुख्य धारा से आज भी पिछड़े हुए हैं।
पोरसा के रायपुर के बाद प्रोग्रेस-वे भिंड से जुड़ेगा
मुरैना के पोरसा के रायपुर के बाद प्रोग्रेस-वे भिंड से जुड़ेगा। यहां के 25 गांव से होते हुए इसे उप्र के इटावा से जोड़ा जाएगा। शुरुआत में प्रोग्रेस वे भिंड शहर से सटे बरही और रानीपुरा गांव से गुजरेगा। इसके बाद अटेर क्षेत्र के 23 गांव से प्रोग्रेस-वे गुजरना है। भिंड के 13 गांव ऐसे हैं जो बीहड़ में मौजूद हैं या उससे सटे हुए।
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तीन राज्यों को कवर कर बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे से जुड़ेगा
अटल प्रोग्रेस-वे को राजस्थान से मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश तक ले जाया जाएगा। 404 किलोमीटर लंबा ये प्रोग्रेस वे राजस्थान में कोटा के सीमाल्या गांव से शुरू होगा और फिर श्योपुर, मुरैना से भिंड होते हुए इटावा तक पहुंचेगा।
इटावा में ननवा गांव पर इस प्रोग्रेस-वे को बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे से जोड़ दिया जाएगा। इस पूरे रूट में करीब 150 गांव प्रोग्रेस वे से कवर होंगे और इमनें से 85 गांव ऐसे हैं जो चंबल के बीहड़ कहलाते हैं या फिर उन बीहड़ों से सटे हुए हैं।