
नईदुनिया प्रतिनिधि, मुरैना। आगरा-ग्वालियर ग्रीनफील्ड सिक्सलेन प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण को लेकर किसानों का आक्रोश सामने आया है। जिला कांग्रेस और मध्यप्रदेश किसान सभा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान कलेक्टोरेट पहुंचे और प्रदर्शन किया। किसानों ने निजी जमीन के बदले चार गुना मुआवजा देने की मांग उठाई।
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने कहा कि राजस्थान और उत्तर प्रदेश की तर्ज पर मध्यप्रदेश में भी मुआवजा बढ़ाया जाना चाहिए। इसके साथ ही सिक्सलेन-वे की ऊंचाई कम करने, उजाड़ी गई फसलों का तत्काल भुगतान करने और फसल कटाई तक समतलीकरण कार्य रोकने की मांग की गई।
जमीन अधिग्रहण की स्थिति और विरोध
ग्रीनफील्ड सिक्सलेन-वे परियोजना के लिए मुरैना, अंबाह और बानमोर क्षेत्र में लगभग 200 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की जा रही है। इसमें 22 गांव शामिल हैं, जिनमें से 19 गांवों की 196.2433 हेक्टेयर जमीन पर प्रशासन ने कब्जा दिला दिया है।
हालांकि दो से तीन गांवों में किसानों का विरोध जारी है, जिससे अधिग्रहण प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। लगभग 75 प्रतिशत जमीन अधिग्रहण पूरा होने के बाद यह मुद्दा फिर जोर पकड़ रहा है।
मुआवजा नीति पर असमंजस
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अधिकारियों के अनुसार मुआवजे का निर्धारण राज्य सरकार द्वारा तय गुणांक के आधार पर किया जाता है। मध्यप्रदेश में यह गुणांक एक है, जबकि राजस्थान और उत्तर प्रदेश में दो है।
इसी कारण वहां मुआवजा चार गुना तक पहुंच जाता है, जबकि मध्यप्रदेश में यह दो गुना ही रहता है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक राज्य सरकार गुणांक नहीं बढ़ाती, तब तक चार गुना मुआवजा संभव नहीं है।
तीन साल में नहीं बढ़े कलेक्टर रेट
इस मामले में एक और अहम मुद्दा सामने आया है। जिन 25 गांवों की जमीन परियोजना में शामिल है, वहां पिछले तीन साल से कलेक्टर रेट में कोई वृद्धि नहीं हुई है।
जिला मूल्यांकन समिति, जिसमें विधायक भी शामिल होते हैं, ने इन दरों को नहीं बढ़ाया। जबकि अन्य क्षेत्रों में 20 से 100 प्रतिशत तक वृद्धि की गई है। इससे किसानों को मिलने वाला मुआवजा प्रभावित हुआ है और असंतोष बढ़ा है।
फसल नुकसान का मुआवजा स्वीकृत
एनएचएआई के अनुसार जिन किसानों की सरसों और गेहूं की खड़ी फसल समतलीकरण के दौरान नष्ट हुई है, उनके लिए 1.80 करोड़ रुपये का मुआवजा स्वीकृत किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि अप्रैल के पहले या दूसरे सप्ताह से यह राशि किसानों के बैंक खातों में जमा कराई जाएगी।
70 प्रतिशत जमीन मिलने के बाद शुरू हुआ काम
परियोजना का काम जीआर इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी द्वारा किया जा रहा है। कंपनी ने 70 प्रतिशत जमीन मिलने के बाद खेतों को समतल करने और मिट्टी भराव का काम शुरू कर दिया है।
इसके साथ ही चंबल नदी पर केबल स्टे तकनीक से बड़े पुल के निर्माण की तैयारी भी की जा रही है। यह पुल प्रयागराज के नैनी और कोटा के चंबल पुल की तर्ज पर बनाया जाएगा।
प्रदर्शन के दौरान जिला कांग्रेस अध्यक्ष मधुराज तोमर और किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष अशोक तिवारी ने एडीएम को राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा।
कांग्रेस ने अलग से भी कलेक्टर को ज्ञापन दिया, जिसमें पेट्रोल-डीजल की कीमतों, गैस की किल्लत और बिजली सप्लाई से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए। किसानों और नेताओं ने चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन और तेज किया जाएगा।