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प्राचीन पांडुलिपि में मिला गौरगजगढ़ राजमंडल का इतिहास, गोंड राजवंश की स्थापना और गोरखनाथ सहित अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण का उल्लेख

रायसेन जिले में उपलब्ध ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व की पांडुलिपियों का सर्वे, सूचीकरण एवं डिजिटलीकरण का कार्य किया जा रहा है। अभियान के दौरान प्राचीन...और पढ़ें

By Ambuj MaheshwariEdited By: manoj dubey
Publish Date: Wed, 01 Jul 2026 06:21:59 PM (IST)Updated Date: Wed, 01 Jul 2026 06:27:41 PM (IST)
प्राचीन पांडुलिपि में मिला गौरगजगढ़ राजमंडल का इतिहास, गोंड राजवंश की स्थापना और गोरखनाथ सहित अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण का उल्लेख
यह प्रतीकात्मक फोटो एआई से बनाई गई है।

HighLights

  1. कई मंदिरों, दुर्गों और नगरों के निर्माण व पुनर्निर्माण का वर्णनं
  2. परमार राजाओं से युद्ध और संधियों का भी इसमें है उल्लेख
  3. रायसेन में “ज्ञान भारतम् मिशन” अंतर्गत चलाया जा रहा अभियान

नवदुनिया प्रतिनिधि,रायसेन। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित “ज्ञान भारतम् मिशन” के अंतर्गत जिले में उपलब्ध ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व की पांडुलिपियों का सर्वे, सूचीकरण एवं डिजिटलीकरण का कार्य किया जा रहा है।

अभियान के दौरान बरेली एसडीएम अंकित जैन को प्राचीन पांडुलिपि प्राप्त हुई हैं जिसमें गौरगजगढ़ (गौरझामगढ़) राजमंडल का इतिहास है।

यह गौरगजगढ़ (गौरझामगढ़) राजमंडल का इतिहास है

पांडुलिपि के प्रारंभिक भाग में उल्लेख है कि यह गौरगजगढ़ (गौरझामगढ़) राजमंडल का इतिहास है। इसमें लिखा है कि गोंड राजवंश की स्थापना हुई और विभिन्न राजाओं ने शासन किया। प्रारंभिक शासकों में राजा भीमनाग, भीमकोट, गोरखनाथ से जुड़े उल्लेख, राजा गोरक्ष शाह आदि का वर्णन मिलता है।

आगे राजा अमर सिंह का उल्लेख है, जिन्होंने लगभग 28 वर्ष शासन किया। उनके बाद विक्रम सिंह, फिर भीम देव और अन्य शासकों का वर्णन आता है।

किले, नगर और तालाब बनवाने का वर्णन

पांडुलिपि के मध्य भाग में राजा गोपाल शाह का उल्लेख है, जिन्होंने एक नया नगर बसाया। इस नगर के आसपास जैसे बारी गढ़, चौकी गढ़, पंचमेढ़ी, छनेरा आदि का भी उल्लेख मिलता है। पंचमेढ़ी का अर्थ है पांच देवताओं का स्थान (ये गोंडी भाषा का शब्द है।


गोंडो की भाषा में तेलुगु, गोंडी, हिंदी, संस्कृत के शब्द मिले जुले होते हैं) बाद में रामचंद्र, जगत सिंह, महाराज सिंह, दुर्जनमल, प्रतापादित्य, यशराज आदि राजाओं का क्रम आता है। कुछ राजाओं द्वारा किले, नगर और तालाब बनवाने तथा राज्य विस्तार का वर्णन है।

परमार राजाओं से युद्ध और संधियों का है वर्णन

पांडुलिपि के अंतिम भाग में उल्लेख है कि इसमें त्रिलोकचंद्र, त्रिभुवन राय, पृथ्वीसिंह, भारतीचंद्र, मदन सिंह, रामशाह, उदयवर्धन सिंह आदि शासकों का उल्लेख मिलता है। परमार राजाओं से युद्ध और संधियों का वर्णन है। एक स्थान पर अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण का उल्लेख भी है।

कई मंदिरों, दुर्गों और नगरों के निर्माण व पुनर्निर्माण का वर्णन मिलता है। अंत में राजा उदय सिंह/उदयवर्धन सिंह तक वंशावली पहुंचती है। इसी प्रकार अन्य प्राचीन पांडुलिपियां भी प्रशासन का सर्वे कर उन्हें ज्ञान भारतम् एप पर अपलोड कराया जा रहा है।

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समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखना अभियान का उद्देश्य

अभियान का उद्देश्य ज्ञान भारतम् पोर्टल एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्राचीन पांडुलिपियों का डेटा संकलित कर भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखना है। इस अभियान की विशेष बात यह है कि “ज्ञान भारतम् एप” के माध्यम से कोई भी नागरिक, संस्था, मंदिर, आश्रम, पुस्तकालय, शिक्षण संस्थान अथवा निजी संग्रहकर्ता स्वयं अपनी पांडुलिपियों का सर्वे कर सकता है।

नागरिक मोबाइल ऐप के माध्यम से पांडुलिपियों की जानकारी, फोटो एवं आवश्यक विवरण अपलोड कर सीधे अभियान से जुड़ सकते हैं।