
नईदुनिया प्रतिनिधि, ब्यावरा। जंगल की रखवाली करने निकले वनकर्मियों को अब पेड़ों से नहीं, पथराव और कुल्हाड़ियों से जूझना पड़ रहा है। राजगढ़ जिले में सागौन तस्करी ने आतंक का रूप ले लिया है। मंगलवार रात सुठालिया क्षेत्र में महज 5 वनकर्मियों को 15-16 हथियारबंद तस्करों के साथ दो घंटे तक जान हथेली पर रखकर सामना करना पड़ा। कम स्टाफ, टूटे संसाधन और जानलेवा हमलों के बीच भी वन अमला पीछे नहीं हटा। आखिर में तस्कर लकड़ी छोड़कर भाग खड़े हुए, लेकिन जाते-जाते सरकारी गाड़ी का बोनट और टायर तोड़ गए।
रात करीब 9.30 बजे वन विभाग की पेट्रोलिंग टीम सुठालिया क्षेत्र के कच्चे मार्गों पर गश्त कर रही थी। इसी दौरान उन्हें बाइक पर सागौन की लकड़ी लादकर ले जाते कुछ संदिग्ध दिखे। वनकर्मियों ने उन्हें रोकने का प्रयास किया तो तस्करों ने 50-60 मीटर दूर अपने वाहन खड़े कर दिए। जैसे ही विभागीय वाहन आगे बढ़ा, तस्करों ने दोनों तरफ से पत्थरबाजी शुरू कर दी। इस पथराव में तीन वनकर्मी जख्मी होकर गिर पड़े। तभी कुछ ग्रामीण भी मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों को देख तस्करों ने बाइक से बंधी रस्सियां काटकर सागौन की सिल्लियां गिराईं और नरी, हरिपुरा, परधानी-कुंडल की दिशा में भाग निकले।
मौके पर मौजूद वनकर्मी ने बताया, तस्करों की संख्या करीब 15-16 थी। वे शुरू से ही धमकाने के लहजे में बात कर रहे थे। बार-बार कह रहे थे - भाग जाओ, वरना जान से हाथ धो बैठोगे। या थोड़ा पास आओ, फिर समझाते हैं। हम लोग अड़े रहे। आधा घंटा तक बहस चलती रही। हमने साफ कह दिया कि माल लेकर नहीं जाने देंगे।खेतों में पत्थर खत्म होने पर तस्कर करीब 100 मीटर पीछे जाकर दोबारा पत्थर लेकर लौटे। इसी दौरान वनकर्मियों ने एक वाहन को मोड़ लिया। तस्कर कुल्हाड़ी लेकर पास आए और पिकअप के टायर काट दिए, शीशे तोड़े और बोनट पर वार किए। तभी पुलिस बल भी पहुंच गया और तस्कर बाइक छोड़कर भाग गए।
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वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह पहली घटना नहीं है। पहले भी कई बार तस्कर वनकर्मियों पर हमला कर चुके हैं। स्टाफ की कमी और संसाधनों की सीमितता के बीच हथियारबंद तस्करों से निपटना चुनौती बन गया है। इसी वजह से तस्करों के हौसले बढ़ते जा रहे हैं। डीएफओ मौके पर पहुंचे और पूरे घटनाक्रम का जायजा लिया। अज्ञात तस्करों के खिलाफ वन अधिनियम की धाराओं में प्रकरण दर्ज कर तलाश शुरू कर दी गई है।