
नईदुनिया प्रतिनिधि, राजगढ़। कूनो नेशनल पार्क का चीता केपी-3 एक बार फिर रोमांच का कारण बन गया। शनिवार देर रात वह अचानक टीम की लोकेशन से गायब हो गया, जिससे वन विभाग और कूनो की टीम में हलचल मच गई। करीब 2–3 घंटे की तलाश के बाद रविवार अलसुबह वही चीता अपने पुराने ठिकाने के पास फिर नजर आया, तब जाकर अधिकारियों ने राहत की सांस ली।
जानकारी के अनुसार कूनो नेशनल पार्क से निकला चीता केपी-3 शुक्रवार सुबह करीब 6.30 बजे कालीपीठ क्षेत्र में पहुंचा था। जहां उसने थाने से करीब 300 मीटर की दूरी पर एक पेड़ की छांव में सुबह से लेकर शाम तक झाड़ियों में आराम किया था। इसके बाद शाम करीब 7 बजे बाद वह कालीपीठ से आगे बढ़कर शनिवार सुबह 6 बजे राजगढ़ के रहवासी क्षेत्र बाडया के नजदीक आ पहुंचा था।बाड़या से 300 मीटर की दूरी पर नीम के पेड़ की छांव को आश्रय बनाया था और दिनभर वहीं समय बिताया।
पानी पीने गया फिर खो गई लोकेशन
शनिवार देर रात को वह समीप में ही मौजूद खोयरे में संभवत: पानी पीने के लिए उतर गया था। बताया जा रहा है कि चीता रात में पास के खोयरे में पानी पीने उतरा था, इसी दौरान उसकी लोकेशन ट्रैकिंग से बाहर हो गई। हालांकि सुबह वह उसी स्थान से लगभग 100 मीटर दूर सुरक्षित बैठा मिला, जहां वह पहले नीम के पेड़ के नीचे आराम कर रहा था।
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दो दिन से राजगढ़ में डाला डेरा
पिछले दो दिनों से चीता राजगढ़ के बाडया क्षेत्र के आसपास ही डेरा डाले हुए है। हैरानी की बात यह है कि गुरुवार रात आखिरी बार मनोहरथाना क्षेत्र में एक बकरी के बच्चे का शिकार किया था। इसके बाद वह कालीपीठ पहुंच गया था। राजगढ़ में शनिवार सुबह आने से लेकर रविवार शाम तक उसने कोई शिकार नहीं किया गया।वह तब से ही भूखा-प्यासा बैठा हुआ है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि रास्ते में किसी जल स्रोत के पास उसने शिकार किया हो सकता है, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।
वन विभाग और कूनो की टीम लगातार उसकी निगरानी कर रही है। आसपास के ग्रामीणों को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है, ताकि किसी तरह की अप्रिय घटना से बचा जा सके।
चीता जब से राजगढ आया है तब से वह यहीं पर मौजूद है। शनिवार 7 बजे बाद नीम के पेड़ के नीचे से उठा था, लेकिन 100 मीटर दूर जाकर दूसरे स्थान पर बैठ गया।तब से लेकर रविवार शाम तक वह वहीं पर बैठा रहा।हमारी टीमें लगातार निगरान कर रही है।-शिव कुमार चौहान, वन परिक्षेत्र अधिकारी