आईपीएल के साथ सट्टा तेज, रतलाम में क्रिकेट सट्टे में ग्राहकों को पकड़ रही पुलिस, बुकी गिरफ्त से दूर
जानकारी के मुताबिक कुछ बड़े बुकी रतलाम के बाहर से भी अपना नेटवर्क ऑपरेट कर रहे हैं, जबकि शहर में ही रोजाना लाखों रुपये का लेन-देन हो रहा है। पुलिस बड़ ...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 09 Apr 2026 10:11:02 PM (IST)Updated Date: Thu, 09 Apr 2026 10:33:13 PM (IST)
आईपीएल सट्टा।HighLights
- वेबसाइट के जरिये लग रहे हैं दांव।
- जानकारी के बाद भी नहीं कार्रवाई।
- पुलिस बड़े बुकी तक नहीं पहुंची।
रतलाम। आईपीएल (इंडियन प्रीमियर लीग) शुरू होते ही शहर में क्रिकेट सट्टेबाजी दोगुनी रफ्तार से बढ़ गई है। गुमनाम कॉलोनियों और कॉटेजों में सक्रिय बुकी लैपटाप, दर्जनों सिम कार्ड, मोबाइल फोन, वाई-फाई सेटअप और हिसाब-किताब के रजिस्टर के जरिए हार-जीत के दांव संचालित कर रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक कुछ बड़े बुकी रतलाम के बाहर से भी अपना नेटवर्क ऑपरेट कर रहे हैं, जबकि शहर में ही रोजाना लाखों रुपये का लेन-देन हो रहा है। पुलिस बड़े बुकी तक पहुंचने में नाकाम साबित हो रही है और केवल छोटे स्तर के ग्राहकों तक ही कार्रवाई सीमित है।
पिछले तीन माह में माणक चौक थाना में सट्टा आईडी से जुड़े केवल दो प्रकरण दर्ज किए गए, जिनमें एक ही वेबसाइट सामने आई। हाल ही में 3 अप्रैल को माणक चौक पुलिस ने रामगढ़ निवासी रूपेश शर्मा को क्रिकेट सट्टा करते पकड़ा था।
जांच में मोबाइल के गूगल क्रोम ब्राउजर में बनी ऑनलाइन आईडी मिली, जिसके जरिए वह आइपीएल में सनराइजर्स हैदराबाद और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच चल रहे मैच पर दांव लगाता पाया गया। इस मामले में पुलिस को क्रिकेट आईडी देने वाले राजकुमार गेहलोत की तलाश है।
इसी तरह फरवरी में पैलेस रोड पर आरोपित वैभव पितलिया को पकड़ा गया था, जिसके पास से भी इसी वेबसाइट की सट्टा आइडी मिली थी। उस दौरान वह टी-20 मुकाबले में वेस्टइंडीज और जिम्बाब्वे के मैच पर सट्टा कर रहा था।
गौरतलब है कि यह वेबसाइट पहले भी कई मामलों में सामने आ चुकी है, लेकिन प्रकरणों को थाना स्तर से साइबर सेल तक नहीं भेजा जा रहा है। यदि साइबर स्तर पर जांच हो, तो सट्टा नेटवर्क के बड़े संचालकों तक पहुंच संभव हो सकती है।
साइबर तक नहीं पहुंच रहे मामले
शहर में क्रिकेट सट्टे के मामलों में लगातार सामने आ रही है, लेकिन इसके बावजूद इस प्लेटफार्म की जांच साइबर सेल तक नहीं पहुंच रही है। यदि इन मामलों को साइबर पुलिस को सौंपा जाए, तो सर्वर लोकेशन, आइडी संचालन और पेमेंट ट्रेल जैसे तकनीकी पहलुओं की गहराई से जांच संभव हो सकती है। इसके जरिए सट्टा नेटवर्क के बड़े संचालकों तक पहुंचने का रास्ता खुल सकता है।