
नईदुनिया प्रतिनिधि, रतलाम। तपती सड़कों, आग उगलते सूरज और 46.5 डिग्री तापमान के बीच शहर में एक ऐसा इलाका भी है, जहां हरियाली आज भी लोगों को राहत दे रही है। रेलवे कालोनी में घने पेड़ों और प्राकृतिक हरित वातावरण के कारण तापमान शहर के अन्य हिस्सों की तुलना में 2 से 3 डिग्री तक कम रहता है। यह इलाका साफ संदेश देता है कि पेड़ केवल छांव ही नहीं देते, बल्कि शहर की तपिश कम करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं।
मई की भीषण गर्मी ने इस बार रतलाम को झुलसा दिया है। मंगलवार शहर के इतिहास का सबसे गर्म दिन रहा, जब अधिकतम तापमान सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ते हुए 46.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। वहीं रेलवे कालोनी आज भी हरियाली की ठंडी छांव का अहसास कराती है। इसकी सबसे बड़ी वजह रेलवे की स्थापना के समय से सुविचारित वृक्षारोपण व्यवस्था है। करीब तीन से चार किलोमीटर में फैली रेलवे कालोनी में लगभग पांच हजार छोटे-बड़े पेड़ मौजूद हैं। आम, इमली, नीम, पीपल, बबूल और अन्य छायादार वृक्ष पूरे क्षेत्र को प्राकृतिक कूलर जैसा वातावरण प्रदान करते हैं।
रेलवे कालोनी की मुख्य सड़कें दोनों ओर से पेड़ों की घनी शाखाओं से ढंकी रहती हैं। कालोनी में प्रवेश करते ही तापमान और वातावरण का अंतर साफ महसूस होने लगता है। इसके उलट शहर के पुराने बाजारों और नए विकसित क्षेत्रों में हरियाली तेजी से खत्म हुई है। सड़क चौड़ीकरण, सीवरेज लाइन, भवन निर्माण और विकास योजनाओं के लिए पिछले दस वर्षों में हजारों पेड़ काटे गए। नगर निगम कार्यालय के सामने निर्माणाधीन गोल्ड काम्प्लेक्स क्षेत्र इसका बड़ा उदाहरण है। कभी यहां बड़े-बड़े पेड़ों की वजह से पूरा इलाका मिनी वन क्षेत्र जैसा दिखाई देता था, लेकिन अब वहां केवल कंक्रीट और धूल नजर आती है।

लगातार पेड़ों की कटाई, जलस्रोतों पर अतिक्रमण, बढ़ते वाहन, कंक्रीट निर्माण और घटता भूजल स्तर और एसी का बढ़ता उपयोग शहर की बढ़ती गर्मी के प्रमुख कारण हैं। दिन के साथ रातें भी गर्म होती जा रही हैं। प्रकृति उन्मुख जीवनशैली, शासन की योजनाएं और सामाजिक दायित्व से ही इसका निराकरण संभव है। विभागीय स्तर पर भी योजनाओं का क्रियान्वयन समन्वय बनाकर करना जरूरी है। पौधे को वृक्ष बनाने तक जिम्मेदारी लेना होगी। -डा खुशालसिंह पुरोहित, पर्यावरणविद
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