Ratlam News: मौत के बाद रतलाम के युवा ने रोशन कर दी तीन लोगों की जिंदगी, स्वजनों ने इन अंगों का किया दान
मध्य प्रदेश के रतलाम के डायलिसिस टेक्नीशियन यथार्थ के निधन के बाद उसके अंग स्वजनोंं ने दान किए। एक हादसे के बाद यथार्थ गंभीर रूप से घायल हो गया था। ...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 20 Jun 2024 10:57:30 AM (IST)Updated Date: Thu, 20 Jun 2024 10:57:30 AM (IST)
पहला चित्र यथार्थ परिहार का। दूसरा चित्र सांकेतिक।HighLights
- रतलाम के युवक यथार्थ की मौत के बाद किया अंगदान।
- स्वजनों ने अंगदान में दिया युवक का हार्ट और दोनों आंखें।
- डायलिसिस टेक्नीशियन छत से गिरकर घायल हुआ था।
रतलाम। रतलाम के बेटे ने अपनी जान जाने के बाद अंगदान कर तीन व्यक्तियों की जिंदगी रोशन की। मांगीलाल पटवारी के पौत्र, प्रकाश परिहार के पुत्र, गगन वर्मा, राघव वर्मा, माधव परिहार के छोटे भाई व राधे परिहार के बड़े भाई अलकापुरी निवासी यथार्थ परिहार (दाऊ) का निधन हो गया।
दाऊ की शादी को 14 जून को मात्र दो माह ही हुए थे और उसके हाथों की मेहंदी भी नहीं निकली थी। यथार्थ डायलिसिस टेक्नीशियन था और डायलिसिस के माध्यम से मानव सेवा के पथ पर अग्रसर था।
ड्यूटी खत्म होने के बाद भी अगर उसको काॅल आता था, तब भी वह सेवा के लिए तत्पर रहता था और सेवा के लिए तुरंत हाॅस्पिटल पहुंचता था।
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छत से गिरने के कारण यथार्थ के सिर में गंभीर चोट लगी थी। इसके बाद उसे वड़ोदरा रेफर किया गया था। वड़ोदरा के पारूल सेवा आश्रम मेडिकल महाविद्यालय के अस्पताल में आईसीयू में वेंटिलेटर पर जीवन और मृत्यु के बीच करीब 15 दिनों तक संघर्ष करते हुए 16 जून को उसका निधन हो गया।
यथार्थ के पिता प्रकाश परिहार ने पुत्र की मौत जैसा वज्रपात होने के बाद अंगदान करने का साहसिक व ऐतिहासिक निर्णय लिया। डाॅक्टरों की टीम ने हृदय व दोनों नेत्रों उत्सर्जित किए।
आईसीयू में 15 दिन तक वेंटिलेटर पर रहने के कारण दोनों किडनियां प्रत्यारोपण के योग्य नहीं होने के कारण नहीं ली जा सकी।
पारूल अस्पताल प्रशासन ने पुलिस प्रशासन के माध्यम से ग्रीन कारिडोर बनाकर हार्ट को प्रत्यारोपण के लिए तुरंत अहमदाबाद भेजा गया। परिहार परिवार के घर का चिराग जीते जी डायलिसिस के माध्यम से कई जानें बचाता रहा और निधन के बाद भी तीन घरों के चिराग अंगदान के माध्यम से रोशन कर गया।