
नईदुनिया प्रतिनिधि, सीधी। मध्य प्रदेश के सीधी जिले से प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा देने वाला एक मामला सामने आया है। जनपद पंचायत मझौली में पदस्थ सब इंजीनियर अनित कुमार दीपांकर द्वारा विभाग के ऑफिशियल व्हाट्सएप ग्रुप में किया गया एक मैसेज इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस मैसेज के स्क्रीनशॉट सामने आने के बाद विभाग में होने वाली अंदरूनी आर्थिक अनियमितताओं और जबरन वसूली का खेल खुलकर सामने आ गया है।
वायरल हो रहे चैट के अनुसार, उपयंत्री अनित कुमार दीपांकर ने ग्रुप में मैसेज कर सभी ग्राम पंचायतों के सचिवों और रोजगार सहायकों को प्रति पंचायत तीन हजार रुपये की राशि तत्काल जमा करने का निर्देश दिया था। इस अवैध फरमान का समर्थन करते हुए ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (आरईएस) मझौली की सहायक यंत्री व प्रभारी अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओ) सरिता पटेल ने भी ग्रुप में लिखा कि यह राशि आज ही जमा की जाए।
माना जा रहा है कि बीते 25 फरवरी को जिले में हुए राज्यपाल के कार्यक्रम के दौरान जो प्रशासनिक खर्च हुआ था, उसी की भरपाई के लिए यह अनधिकृत वसूली की जा रही है। मझौली जनपद पंचायत के अंतर्गत कुल 53 ग्राम पंचायतें आती हैं। यदि दो अपवाद स्वरूप पंचायतों को छोड़ दिया जाए, तो शेष 51 ग्राम पंचायतों से 3,000 रुपये प्रति पंचायत के हिसाब से कुल 1.50 लाख (डेढ़ लाख) रुपये की भारी-भरकम उगाही का खाका तैयार किया गया था। इस मामले में जब अधिकारियों से दो पंचायतों को छूट देने का कारण पूछा गया, तो वे कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे सके।
इस गंभीर मामले पर जब उपयंत्री और प्रभारी एसडीओ से पूछताछ की गई, तो उन्होंने कई तरह के तकनीकी बहानों का सहारा लिया। उपयंत्री अनित कुमार दीपांकर का कहना है कि लेबर बजट, डीपीआर और प्रोजेक्ट को भोपाल स्तर से तैयार करवाना पड़ता है, जिसके लिए रुपयों की आवश्यकता होती है।
प्रभारी एसडीओ सरिता पटेल ने खुलकर स्वीकार किया कि उन्हें पहले हुए राज्यपाल के कार्यक्रम का 1 लाख 78 हजार रुपये का बजट या भुगतान शासन से नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि विभाग को जिम्मेदारी तो दे दी जाती है पर बजट नहीं दिया जाता, इसलिए ऐसे ही काम चलाना पड़ता है।
व्हाट्सएप चैट सार्वजनिक होने के बाद राजनीतिक स्तर पर भी विरोध शुरू हो गया है। भाजपा मंडल अध्यक्ष प्रवीण तिवारी ने इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग उठाई है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पार्टी की ओर से कभी भी किसी शासकीय या गैर-शासकीय कार्यक्रम के नाम पर इस तरह की अवैध वसूली करने के निर्देश नहीं दिए जाते हैं। इस तरह के कृत्य से न केवल प्रशासन बल्कि संगठन की भी छवि धूमिल होती है, अतः दोषी अधिकारियों पर कड़ी से कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।