
नईदुनिया प्रतिनिधि, रीवा। रीवा जिले में बीते 24 घंटों के दौरान हुई मूसलाधार बारिश ने एक दशक पुराने विनाशकारी परिदृश्य को फिर से दोहरा दिया है। जिले में सवा सात इंच से अधिक (187 मिमी) बारिश दर्ज किए जाने से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। लगातार जारी बारिश के कारण तमाम प्रमुख नदियां और नाले उफान पर हैं, जिससे न केवल ग्रामीण अंचलों में बल्कि शहरी बस्तियों में भी गंभीर जलभराव की स्थिति निर्मित हो गई है। जिले में इस मानसून सत्र का कुल बारिश का आंकड़ा 426.8 मिमी तक पहुंच गया है।
तेज जल आवक को देखते हुए बाणसागर को छोड़कर क्षेत्र के लगभग सभी छोटे-बड़े जलाशय लबालब भर चुके हैं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बीहर नदी के सभी 18 गेट खोल दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त बकिया बराज के 14, मेजा के 5 तथा अंदवा बांध के 4 गेट खोलकर पानी की निकासी की जा रही है।
क्षेत्रवार बारिश की स्थिति देखें तो रायपुर कर्चुलियान, गुढ़ और त्योंथर में सर्वाधिक 120-120 मिमी वर्षा हुई है। वहीं मनगवां में 110 मिमी, हुजूर में 105 मिमी और सेमरिया में 85 मिमी पानी गिरा है।
तराई क्षेत्र में टमस नदी का जलस्तर पटेहरा में खतरे के बिंदु से करीब ढाई मीटर ऊपर पहुंच गया है। इसी तरह बेलन नदी और उसकी सहायक नदियां नैना व गोरमा भी खतरे के निशान को पार कर चुकी हैं। पिछले 24 घंटों में बेलन नदी के जलस्तर में साढ़े सात फीट की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
जलस्तर में अप्रत्याशित वृद्धि से तराई क्षेत्र की दो दर्जन से अधिक पंचायतों के 50 गांवों का सड़क संपर्क पूरी तरह कट गया है। रीवा और पड़ोसी मऊगंज जिले के 400 से अधिक गांव इस प्राकृतिक आपदा की चपेट में आए हैं, जहां कई कच्चे मकानों के ढहने की भी सूचना है।
प्रशासनिक टीमों ने जलभराव वाले क्षेत्रों में तुरंत मोर्चा संभालते हुए राहत कार्य शुरू कर दिया है:
यह भी पढ़ें- Gen Alpha और Gen Z का इंदौर में प्रदर्शन, कलेक्टर पर देवगुराड़िया से कंपेल तक बस की मांग, कहा- भीख नहीं मांग रहे हैं
लगातार हो रही बारिश और बिजली के खंभों को पहुंचे नुकसान के कारण कई क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति ठप हो गई है। मौसम केंद्र ने चेतावनी दी है कि अगले पांच दिनों तक क्षेत्र में रुक-रुक कर बारिश का यह दौर जारी रहेगा। ऐसे में प्रशासन और आपदा राहत टीमों के लिए जलभराव से निपटना बड़ी चुनौती बना हुआ है।