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    मऊगंज पुलिस का सीएम हेल्प लाइन में ‘फर्जी शिकायत के सिंडिकेट’ का भंडाफोड़, मचा हड़कंप

    आनन-फानन में पुलिस अधीक्षक ने आरक्षक विवेक यादव को लाइन हाजिर कर दिया है लेकिन बड़ा सवाल यह है कि असली ‘मगरमच्छों’ पर गाज कब गिरेगी?

    By Shyam MishraEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
    Publish Date: Thu, 18 Jun 2026 02:04:56 PM (IST)Updated Date: Thu, 18 Jun 2026 02:04:56 PM (IST)
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    मऊगंज पुलिस का सीएम हेल्प लाइन में ‘फर्जी शिकायत के सिंडिकेट’ का भंडाफोड़, मचा हड़कंप
    खुद ही उसका जादुई निराकरण दिखाकर फाइलें बंद कर दी जाती थीं। सौजन्‍य सोशल मीडिया

    HighLights

    1. सिंडिकेट ने अपनी रेटिंग चमकाने का ‘टूल’ बना दिया
    2. जनता भ्रष्टाचार के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार मानती है
    3. ब्लैकमेलरों और झूठी शिकायत करने वालों की लिस्ट मांगी है

    नईदुनिया प्रतिनिधि, मऊगंज। मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार जिस ‘सीएम हेल्पलाइन 181’ को पीड़ित जनता की आखिरी उम्मीद और भ्रष्टाचार के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार मानती है, मऊगंज पुलिस के एक शातिर सिंडिकेट ने उसे अपनी रेटिंग चमकाने का ‘टूल’ बना दिया। मऊगंज पुलिस के इस काले कारनामे का भंडाफोड़ होने के बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है।

    इंसाफ देने के बजाय खुद ही फर्जी शिकायतकर्ता बन बैठा था

    मऊगंज पुलिस का यह सिंडिकेट जनता को इंसाफ देने के बजाय खुद ही फर्जी शिकायतकर्ता बन बैठा था। आला अधिकारियों की नजरों में कागजी छवि चमकाने के लिए पिछले कुछ महीनों में महज 21 मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करके 233 फर्जी शिकायतें दर्ज करा दी गईं।


    6 मिनट के भीतर 5 शिकायतें ठोक दी गईं

    पुलिस कर्मियों ने खेल खेलते हुए महज 6 मिनट के भीतर 5 शिकायतें ठोक दी गईं। साफ है कि बंद कमरे में बैठकर खुद ही शिकायत लिखी जाती थी और खुद ही उसका जादुई निराकरण दिखाकर फाइलें बंद कर दी जाती थीं।

    ‘अंकित की 20 साल की बेटी स्कूल के लिए निकली और गायब हो गई’

    इस सिंडिकेट की जालसाजी तब बेनकाब हुई, जब इन्होंने ‘अंकित चौरसिया’ नाम के एक युवक के नाम पर फर्जी शिकायत दर्ज की। पुलिस ने कागजों में कहानी गढ़ी कि ‘अंकित की 20 साल की बेटी स्कूल के लिए निकली और गायब हो गई।’ जब अंकित चौरसिया को संपर्क किया गया, तो उसने खाकी के झूठ के परखच्चे उड़ा दिए।

    साहब मेरी शादी नहीं हुई तो बेटी कहा से आ जाएगी

    अंकित ने कैमरे पर साफ कहा कि साहब, मेरी तो अभी तक शादी ही नहीं हुई है! जब मेरी शादी ही नहीं हुई, तो मेरी 20 साल की बेटी कहां से गायब हो जाएगी?सोचिए, अपनी झूठी ग्रेडिंग सुधारने के लिए इस सिंडिकेट ने किडनैपिंग, लूट, डकैती और नाबालिग बच्चियों से छेड़छाड़ जैसे संगीन मामलों को फर्जीवाड़े का जरिया बनाया।

    खेल में सिर्फ एक आरक्षक नहीं, बल्कि पूरा सिंडिकेट

    सूत्रों से सामने आया है कि इस संगठित खेल में सिर्फ एक आरक्षक नहीं, बल्कि पूरा सिंडिकेट काम कर रहा था। इसमें आरक्षक विवेक यादव, जिसे लाइन हाजिर किया गया, डायल 112 के कर्मचारी प्रवेश चौबे और कृष्णा कुशवाहा, थाना प्रभारी का निजी ड्राइवर दयाशंकर तिवारी जो एक ही दिन में 9-9 मामलों में ‘पॉकेट गवाह’ भी बना पाया गया है।

    सवाल मऊगंज थाना प्रभारी रीना सिंह पर उठता

    सीएम हेल्पलाइन के नियमों के मुताबिक, शिकायतों के समाधान के लिए सबसे पहली जिम्मेदार यानी एल 1अधिकारी खुद थाना प्रभारी होती हैं। ऐसे में सुलगता हुआ सवाल मऊगंज थाने की कमान संभाल रही थाना प्रभारी रीना सिंह पर उठता है।

    • क्या यह मुमकिन है कि मैडम को अपनी नाक के नीचे चल रहे इस सिंडिकेट की भनक तक न हो?
    • फिर अपनी कुर्सी और थाने की रैंकिंग बचाने के लिए इस पूरे खेल को उनकी मौन सहमति मिली हुई थी?
    • थाना प्रभारी ने उसी दयाशंकर तिवारी को थाने में क्यों रखा था, जिससे सरकारी गाड़ी चलवाई जा रही थी?
    • आखिर मुख्य निराकरण अधिकारी को बचाने के लिए सिर्फ छोटे आरक्षक की बलि क्यों चढ़ाई जा रही है?

    ब्लैकमेलरों और झूठी शिकायत करने वालों की लिस्ट मांग रही है

    एक तरफ मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार जिला कलेक्टरों से ब्लैकमेलरों और झूठी शिकायत करने वालों की लिस्ट मांग रही है, लेकिन मऊगंज में तो खुद कानून के रखवाले ही सबसे बड़े ‘झूठे शिकायतकर्ता’ बनकर सामने आए हैं।

    इस पूरे मामले में रीवा जोन के पुलिस महानिरीक्षक गौरव राजपूत का कहना है कि मामले की जांच जारी है। अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री की इस बेहद महत्वाकांक्षी योजना को पलीता लगाने वाले इन बड़े चेहरों पर कानून का डंडा कब चलता है।

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