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रीवा में बेटी के लिए बैठे पिता को प्रशासन ने जबरन उठाया, अस्पताल में कराया भर्ती, विधायक अभय मिश्रा को किया नजरबंद

संजय गांधी अस्पताल में प्रसूता कल्पना मिश्रा और उसके नवजात की मौत के मामले में न्याय की लड़ाई अब प्रशासन और परिवार के बीच सीधी टकराहट में बदल गई है।

By Digital DeskEdited By: Nitin Kumar
Publish Date: Thu, 17 Sep 2026 01:37:42 PM (IST)Updated Date: Thu, 17 Sep 2026 01:37:42 PM (IST)
रीवा में बेटी के लिए बैठे पिता को प्रशासन ने जबरन उठाया, अस्पताल में कराया भर्ती, विधायक अभय मिश्रा को किया नजरबंद
विधायक अभय मिश्रा को किया नजरबंद, नईदुनिया

HighLights

  1. कल्पना मिश्रा और नवजात की मौत का मामला
  2. धरने पर बैठे पिता को प्रशासन ने जबरन उठाया
  3. विधायक अभय मिश्रा कंट्रोल रूम में नजरबंद

नईदुनिया प्रतिनिधि, रीवा। संजय गांधी अस्पताल में प्रसूता कल्पना मिश्रा और उसके नवजात की मौत के मामले में न्याय की लड़ाई अब प्रशासन और परिवार के बीच सीधी टकराहट में बदल गई है। अपनी बेटी के लिए 15 दिनों से सिरमौर चौराहे पर आमरण अनशन पर बैठे पिता राम शिरोमणि मिश्रा को प्रशासन ने गत दिवस देर रात जबरन धरना स्थल से उठाकर अस्पताल में भर्ती करा दिया।

परिजनों लगाया गंभीर आरोप

परिजनों का आरोप है कि पिता की तबीयत का हवाला देकर उन्हें अनशन तोड़ने पर मजबूर किया गया। लगातार अन्न त्यागने से उनका शरीर जवाब दे चुका था, वे बैठ भी नहीं पा रहे थे, लेकिन उनकी मांग थी कि दोषी डॉक्टरों पर एफआईआर।


प्रशासन ने उन्हें इलाज के नाम पर हटा दिया और धरनास्थल खाली करा दिया। पिता को हटाए जाने की खबर मिलते ही दूसरे दिन कल्पना को न्याय दिलाने और धरने की लौ को बुझने न देने के लिए सेमरिया विधायक अभय मिश्रा धरना स्थल पर पहुंच गए।

उन्होंने वहीं चादर बिछाकर धरना शुरू कर दिया और कहा कि जब तक एफआईआर दर्ज नहीं होगी, यह लड़ाई रुकेगी नहीं। एक पिता को अस्पताल में कैद कर देने से न्याय की आवाज दबेगी नहीं।

विधायक को किया नजरबंद

सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन हरकत में आ गया। भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा और विधायक अभय मिश्रा को धरनास्थल से उठाकर सिटी कंट्रोल रूम ले जाया गया। कंट्रोल रूम में उन्हें समझाइश दी जा रही है कि वे धरना स्थल पर न जाएं, लेकिन विधायक अपनी जिद पर अड़े हैं।

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न्याय की आवाज नहीं दबेगी- विधायक

अभय मिश्रा ने स्पष्ट कहा है कि यह कोई राजनीतिक धरना नहीं, एक पिता की न्याय की लड़ाई है। प्रशासन भूख हड़ताल पर बैठे बुजुर्ग पिता को उठा सकता है, लेकिन पूरे विंध्य की जनता को नहीं उठा सकता। समाचार लिखे जाने तक विधायक अभय मिश्रा को कंट्रोल रूम में ही नजरबंद रखा गया है।

पुलिस अधिकारी उन्हें लगातार मनाने में जुटे हैं, पर वे धरना जारी रखने पर अडिग हैं। उधर, कल्पना के परिजन और कांग्रेस कार्यकर्ता फिर से सिरमौर चौराहे पर जुटने लगे हैं।

26 अगस्त को कल्पना मिश्रा की मौत के बाद से शुरू हुआ यह आंदोलन अब रीवा में सबसे बड़ा जन आंदोलन बनता जा रहा है, जिसमें प्रशासन के हर दांव के बाद नया चेहरा धरने पर बैठ रहा है।

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