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    रीवा में दर्दनाक हादसा: रेत से लदे डंपर ने ऑटो को मारी जोरदार टक्कर, तीन परिवारों के चिराग बुझे

    दुर्घटना के बाद आशीष उपाध्याय कुछ समय के लिए जीवित थे, तभी ही राहगीर को अपना मोबाइल नंबर दिया, जिसके बाद परिजनों को हादसे की सूचना मिली।

    By Shyam MishraEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
    Publish Date: Fri, 12 Jun 2026 12:35:12 PM (IST)Updated Date: Fri, 12 Jun 2026 12:46:30 PM (IST)
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    रीवा में दर्दनाक हादसा: रेत से लदे डंपर ने ऑटो को मारी जोरदार टक्कर, तीन परिवारों के चिराग बुझे
    इस घटना के बाद से पूरे इलाके में मातम का माहौल छा गया है। सौजन्‍य प्रतीकात्‍मक चित्र

    HighLights

    1. टक्कर इतनी भयानक थी कि ऑटो के परखच्चे उड़ गए
    2. संजय गांधी अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप
    3. इलाज और फर्स्ट एड न मिलने से दम तोड़ दिया

    नईदुनिया प्रतिनिधि रीवा। जिले से एक बेहद दर्दनाक और हृदय विदारक सड़क हादसे की खबर सामने आई है। जिले के गोविंदगढ़ थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले डीहिया स्थित बोरी फैक्ट्री के सामने आज सुबह एक तेज रफ्तार रेत (बालू) लदे डंपर ने एक ऑटो को जोरदार टक्कर मार दी।

    इस भीषण दुर्घटना में ऑटो में सवार तीन लोगों की असामयिक मौत हो गई है । इस घटना के बाद से पूरे इलाके और गांव में मातम का माहौल छा गया है।

    मौसी के घर जा रहे थे ऑटो सवार

    यह दर्दनाक हादसा आज सुबह तकरीबन 10 बजे के आसपास घटित हुआ । ऑटो में सवार होकर लोग अपनी मौसी के घर ग्राम भटलो जा रहे थे। जैसे ही उनकी ऑटो गोविंदगढ़ मार्ग पर ढिया स्थित बोरी फैक्ट्री के समीप पहुंची तभी सामने से आ रहे बालू से लोड एक तेज रफ्तार अनियंत्रित डंपर ने ऑटो को अपनी चपेट में ले लिया और जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भयानक थी कि ऑटो के परखच्चे उड़ गए।


    हादसे में तीन लोगों ने गंवाई जान

    इस भीषण सड़क हादसे में ऑटो में सवार तीनों व्यक्तियों की मौत हो गई । मृतकों की पहचान आशीष कुशवाहा (निवासी बहरी बांध), हरिशंकर चतुर्वेदी (निवासी बहरी बांध), और शैलेंद्र तिवारी (निवासी भटलो) के रूप में की गई है।

    घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय गोविंदगढ़ थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भिजवाया और मामले की जांच शुरू कर दी है।

    परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप

    इस बीच हादसे को लेकर एक बड़ा विवाद भी सामने आया है। मृतकों के परिजनों और स्थानीय लोगों ने संजय गांधी अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में घोर लापरवाही बरतने का गंभीर आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि दुर्घटना के बाद आशीष उपाध्याय (कुशवाहा) कुछ समय के लिए जीवित थे। उन्होंने ही किसी राहगीर को अपना मोबाइल नंबर दिया, जिसके बाद परिजनों को हादसे की सूचना मिली।

    एक्स-रे और सीटी स्कैन जैसी जांचों में समय गंवा दिया

    परिजनों के मुताबिक, जब घायल आशीष को गंभीर हालत में संजय गांधी अस्पताल लाया गया, तो वहां डॉक्टरों ने तुरंत आपातकालीन इलाज शुरू करने के बजाय एक्स-रे और सीटी स्कैन जैसी जांचों में समय गंवा दिया।

    इलाज और फर्स्ट एड न मिलने से दम तोड़ दिया

    समय पर उचित इलाज और फर्स्ट एड न मिलने के कारण आखिरकार उन्होंने भी दम तोड़ दिया। परिजनों ने अस्पताल के इस उदासीन रवैये पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए दोषी डॉक्टरों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने तथा अस्पताल की व्यवस्थाओं को सुधारने की मांग की है ।

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