
नईदुनिया टीम, सतना। मध्य प्रदेश के सतना और उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में लगातार वर्षा और पहाड़ों से उतर रहे पानी ने शनिवार को भारी तबाही मचा दी। स्थिति संभालने सेना बुलानी पड़ी। मंदाकिनी, शरभंग, बरदहा और वाल्मीकि नदियों में आई बाढ़ से प्रभु श्रीराम की तपोभूमि जलमग्न हो गई। मुंबई-हावड़ा रेल मार्ग सतना-मानिकपुर रेलखंड कई किलोमीटर तक जलभराव से पांच घंटे तक प्रभावित रहा। 18 यात्री ट्रेनों व 20 मालगाड़ियों को अलग-अलग स्टेशनों पर रोकना पड़ा। बाद में 10 किमी की गति से ट्रेनें रात तक गुजारी गईं।
बाढ़ के कारण झांसी-मीरजापुर हाईवे, चित्रकूट-सतना मार्ग पर आवागमन रोका गया। रामघाट डूब गया। पुल व बांध क्षतिग्रस्त हुए हैं। तेज बहाव में नयागांव हनुमानधारा मार्ग के पुल की रेलिंग टूट गई। मानिकपुर-सतना मार्ग रपटा बहने से आवागमन ठप हो गया। मठ-मंदिर, होटल-घर डूबने से तीर्थ क्षेत्र में 10 घंटे तक पांच हजार लोग फंसे रहे। सतना जिले में 24 घंटे में 123.3 मिमी (लगभग 4.85 इंच) बारिश हुई। मंदाकिनी नदी का जलस्तर 23 साल पुराना रिकार्ड तोड़ समुद्र तल से 135.200 मीटर पर पहुंच गया, जो वर्ष 2003 में 134.500 मीटर रहा था व इस साल 15 सेमी अधिक है।
नदी में रामघाट पर खतरे के निशान 126.500 मीटर से 8.70 मीटर ऊपर पानी रहा। सूचना पर वायुसेना उतरी और दो हेलीकाप्टर से 18 लोगों और नदी में फंसे दो ट्रक चालकों को सुरक्षित निकाला। चित्रकूट प्रशासन ने नावों-स्टीमर से छतों पर फंसे 500 से अधिक लोगों को बचाया। रेलवे ट्रैक पर भरा डेढ़ फीट पानी- सतना में चितहरा-मझगवां के बीच रेलवे ट्रैक पर सुबह आठ बजे पानी भरने से पवन, काशी, अमृत भारत, सारनाथ, दानापुर, गोदान एक्सप्रेस, रीवा-आनंद विहार, जनता, दुर्ग-नौतनवा व इटारसी एक्सप्रेस समेत कई ट्रेनों को रोकना पड़ा।
रेलवे ने एक बजे से परिचालन शुरू कराया। मझगवां रेलवे अंडरब्रिज के पास पवरिया बाबा की ओर रेल लाइन के नीचे की मिट्टी धंस गई। जबलपुर मंडल के सीनियर डीसीएम शशांक गुप्ता के मुताबिक शनिवार सुबह रेलवे ट्रैक अवरुद्ध रहा। कई यात्री ट्रेनों को रोका गया। सुरक्षा के सभी मापदंड को ध्यान में रखकर रेलवे ट्रैक पर ट्रेनों की आवाजाही शुरू कर दी गई। रेल ब्रिजों की सुरक्षा बढ़ाई गई है।
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मुख्यमंत्री डा़ मोहन यादव रविवार को सतना जिले के चित्रकूट में मंदाकिनी नदी में आई बाढ़ और चित्रकूट में अतिवृष्टि से हुए नुकसान का जायजा लेंगे। शनिवार रात वे दिल्ली से रीवा पहुंचे। उन्होंने आला अधिकारियों के साथ बैठक कर प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य तेज करने के निर्देश दिए। प्रशासन और रेस्क्यू टीम बचाव और राहत के काम में जुटी हुईं हैं। मंदाकिनी नदी की बाढ़ से रामघाट से हनुमान धारा पहुंच मार्ग का पुराना पुल भी क्षतिग्रस्त हुआ है। चित्रकूट में छह आश्रय स्थलों पर रुकने, भोजन और चिकित्सा की व्यवस्था की गई है।