नईदुनिया प्रतिनिधि, सतना। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग में एक वाहन फाइनेंस विवाद की सुनवाई के दौरान अमेरिकी कारोबारी जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी चर्चित ‘एपस्टीन फाइल्स’ का जिक्र पहुंच गया।
मामले में आवेदक की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता ने अपनी दलील के दौरान देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम लेते हुए एपस्टीन फाइल्स से संबंधित मीडिया रिपोर्टों का हवाला दिया।
मामला उपभोक्ता परिवाद क्रमांक 190/2024 का है। उदयसागर, कोठी निवासी कमलेश प्रसाद वर्मा ने सेफ मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनेंशियल सर्विसेज के विरुद्ध परिवाद दायर किया था। विवाद ऑटो वाहन एमपी-19 आर-7829 की फाइनेंसिंग, किश्तों के भुगतान, वाहन जब्ती और बाद में उसकी बिक्री से जुड़ा था।
बहस के दौरान आया एपस्टीन फाइल्स का मुद्दा
आयोग के 28 अक्टूबर 2026 को पारित आदेश के पैरा 13 में दर्ज है कि आवेदक के अधिवक्ता श्यामकिशोर मिश्रा ने बहस के दौरान एपस्टीन फाइल्स का उल्लेख किया। उन्होंने प्रधानमंत्री और पेट्रोलियम मंत्री से संबंधित मीडिया में प्रसारित खबरों तथा तस्वीरों का हवाला देते हुए अपनी दलील रखी।
इस पर आयोग के अध्यक्ष श्यामाचरण उपाध्याय ने टिप्पणी की कि केवल समाचार पत्रों या टेलीविजन पर प्रसारित खबरों के आधार पर इस प्रकार के निष्कर्ष निकालना स्वीकार्य नहीं है।
आदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हुए उनके संबंध में की गई टिप्पणी को निराधार बताया गया और अधिवक्ता को आयोग में इस तरह की भ्रांतियां फैलाने से बचने की हिदायत दी गई।
वाहन फाइनेंस विवाद में खारिज हुआ परिवाद
मूल मामले में आवेदक का आरोप था कि वाहन की किश्तों को लेकर विवाद के बाद मार्च 2022 में उसका ऑटो जब्त कर लिया गया और उसके विरुद्ध 2,34,678 रुपये की वसूली की कार्यवाही शुरू की गई। वहीं फाइनेंस कंपनी का कहना था कि किश्तों का नियमित भुगतान नहीं किया गया।
बकाया राशि की वसूली के लिए नियमानुसार कार्रवाई करते हुए वाहन 37,200 रुपये में बेच दिया गया और बिक्री से प्राप्त रकम ऋण खाते में जमा की गई। कंपनी के अनुसार इसके बाद भी 2,43,187.99 रुपये बकाया थे।
आयोग ने दस्तावेजों और दोनों पक्षों के साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद माना कि किश्तों का नियमित भुगतान साबित नहीं हुआ। साथ ही वाहन जब्त करने और बेचने से पहले आवेदक को नोटिस दिए जाने की बात भी आदेश में दर्ज की गई।
आयोग ने नहीं मानी सेवा में कमी
अंततः आयोग ने माना कि विपक्षी कंपनियों की ओर से सेवा में कमी या अनुचित व्यापार व्यवहार साबित नहीं हुआ। इसी आधार पर कमलेश प्रसाद वर्मा का परिवाद निराधार मानते हुए खारिज कर दिया गया। दोनों पक्षों को अपने-अपने वाद व्यय वहन करने के निर्देश दिए गए।