
नईदुनिया प्रतिनिधि, सीधी। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने सीधी जिले में अप्रैल, 2025 से इस वर्ष मार्च के बीच एक साल में प्रसव पूर्व और प्रसवोत्तर अवधि में 53 गर्भवती महिलाओं की मृत्यु के बारे में स्वतः संज्ञान लिया है। ये मौतें मुख्य रूप से जागरूकता और चिकित्सा सुविधाओं के अभाव के कारण हुई हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित सामुदायिक मातृ स्वास्थ्य लीग रैंकिंग में सीधी जिला लगातार सबसे निचले तीन जिलों में शामिल रहा है। आयोग ने मध्य प्रदेश शासन के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
आयोग ने मीडिया रिपोर्ट के हवाले से कहा कि 53 मृत गर्भवतियों की औसत आयु 26 वर्ष है। इनमें से अधिकांश पहली या दूसरी बार मां बनने वाली महिलाएं थीं। रिपोर्ट में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पताल में डॉक्टरों व तकनीकी विशेषज्ञों सहित बुनियादी ढांचे की कमी का भी पता चला है। इसके कारण मरीजों को दूरस्थ रीवा जिले में उच्च चिकित्सा सुविधाओं के लिए भेजा जाता है, जिससे रास्ते में उनकी जान को खतरा रहता है।
एक एंबुलेंस चालक ने बताया था कि सीधी जिले के कई गांवों में उचित सड़क संपर्क नहीं है, जिससे वर्षा के मौसम में स्थिति और भी जटिल हो जाती है। गर्भवती महिलाओं को एंबुलेंस तक पहुंचने से पहले दो से तीन किलोमीटर तक चारपाई पर ले जाना पड़ता है। एनएचआरसी ने माना कि अगर उल्लेखित तथ्य सत्य हैं, तो मानवाधिकारों के उल्लंघन का यह गंभीर मुद्दा है।
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