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सीधी जिले में 1 साल में 53 गर्भवती महिलाओं की मौत, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सरकार को भेजा नोटिस

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने सीधी जिले में अप्रैल, 2025 से इस वर्ष मार्च के बीच एक साल में प्रसव पूर्व और प्रसवोत्तर अवधि में 53 गर्भवती मह...और पढ़ें

By Neelambuj PandeyEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Tue, 02 Jun 2026 09:08:34 PM (IST)Updated Date: Tue, 02 Jun 2026 09:53:23 PM (IST)
सीधी जिले में 1 साल में 53 गर्भवती महिलाओं की मौत, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सरकार को भेजा नोटिस
सीधी जिले में 1 साल में 53 गर्भवती महिलाओं की मौत (AI Generated Image)

HighLights

  1. जागरूकता और सुविधाओं की कमी के कारण हुईं ये मौतें
  2. एम्बुलेंस तक पहुंचने के लिए चारपाई पर ले जाते हैं ग्रामीण
  3. जिला अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों के 22 पद खाली हैं

नईदुनिया प्रतिनिधि, सीधी। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने सीधी जिले में अप्रैल, 2025 से इस वर्ष मार्च के बीच एक साल में प्रसव पूर्व और प्रसवोत्तर अवधि में 53 गर्भवती महिलाओं की मृत्यु के बारे में स्वतः संज्ञान लिया है। ये मौतें मुख्य रूप से जागरूकता और चिकित्सा सुविधाओं के अभाव के कारण हुई हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित सामुदायिक मातृ स्वास्थ्य लीग रैंकिंग में सीधी जिला लगातार सबसे निचले तीन जिलों में शामिल रहा है। आयोग ने मध्य प्रदेश शासन के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

स्वास्थ्य सुविधाओं में कमी, रीवा करना पड़ रहा रेफर

आयोग ने मीडिया रिपोर्ट के हवाले से कहा कि 53 मृत गर्भवतियों की औसत आयु 26 वर्ष है। इनमें से अधिकांश पहली या दूसरी बार मां बनने वाली महिलाएं थीं। रिपोर्ट में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पताल में डॉक्टरों व तकनीकी विशेषज्ञों सहित बुनियादी ढांचे की कमी का भी पता चला है। इसके कारण मरीजों को दूरस्थ रीवा जिले में उच्च चिकित्सा सुविधाओं के लिए भेजा जाता है, जिससे रास्ते में उनकी जान को खतरा रहता है।


खराब सड़क संपर्क और चारपाई का सहारा

एक एंबुलेंस चालक ने बताया था कि सीधी जिले के कई गांवों में उचित सड़क संपर्क नहीं है, जिससे वर्षा के मौसम में स्थिति और भी जटिल हो जाती है। गर्भवती महिलाओं को एंबुलेंस तक पहुंचने से पहले दो से तीन किलोमीटर तक चारपाई पर ले जाना पड़ता है। एनएचआरसी ने माना कि अगर उल्लेखित तथ्य सत्य हैं, तो मानवाधिकारों के उल्लंघन का यह गंभीर मुद्दा है।

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सीधी में ऐसे हैं स्वास्थ्य सेवाओं के हाल

  • जिन 53 गर्भवतियों की मौत हुई, जिनमें 32 प्रतिशत एनीमिया (रक्ताल्पता) से ग्रसित थीं।
  • जिले में पंजीकृत 23,564 गर्भवतियों में से सात हजार से अधिक महिलाएं एनीमिया से ग्रसित हैं।
  • जिला अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों के 37 पद स्वीकृत हैं जिसमें 15 पदों में पदस्थापना है और 22 पद रिक्त हैं।