नवदुनिया प्रतिनिधि, सीहोर। कोनाझिर क्षेत्र में बनाए जा रहे नगर वन प्रोजेक्ट में भारी अनियमितताओं का मामला सामने आया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि कार्यों के बिल एस्टीमेट से कहीं अधिक बनाए गए। इतना ही नहीं, बीट गार्ड और परिक्षेत्र सहायक द्वारा कथित तौर पर हस्ताक्षर कर बिल बनाए गए, जिसमें रेंजर ने हस्ताक्षर करने से मना कर दिया।
साथ ही इन अनियमितताओं पर आपत्ति दर्ज कराते हुए प्रतिवेदन दिया। इससे यह स्पष्ट होता है कि मामला केवल लापरवाही का नहीं, बल्कि सुनियोजित भ्रष्टाचार का है।
एस्टीमेट राशि और वास्तविक खर्च में बड़ा अंतर
सूत्रों के अनुसार नगर वन का काम देख रहे नाकेदार विशाल नामदेव और परिक्षेत्र सहायक विजय कसौटिया द्वारा बिलों पर हस्ताक्षर किए गए, जबकि रेंजर चंददर सिंह भिलाला ने बिलों पर हस्ताक्षर करने से साफ इनकार कर दिया। रेंजर का कहना है कि एस्टीमेट राशि और वास्तविक खर्च में बड़ा अंतर है। साथ ही जितनी राशि खर्च दिखाई गई है, उतना कार्य मौके पर किया ही नहीं गया। इसी कारण उन्होंने बिलों पर आपत्ति दर्ज की।
1.75 करोड़ खर्च, फिर भी काम अधूरे
नगर वन प्रोजेक्ट तीन वर्षों की अवधि का है। अब तक करीब 1 करोड़ 75 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं, जबकि केवल 25 लाख रुपये की राशि शेष बताई जा रही है। इसके बावजूद जमीनी हकीकत यह है कि कई कार्य आज भी अधूरे पड़े हैं। न तो बुनियादी सुविधाएं पूरी हुई हैं और न ही वह संरचनाएं दिखाई दे रही हैं।
रुद्राक्ष के पौधे गायब
प्रोजेक्ट के तहत नवग्रह वाटिका, बटरफ्लाय गार्डन, फ्लावर गार्डन और रुद्राक्ष वाटिका विकसित की जानी थी। योजना के अनुसार 400 रुद्राक्ष के पौधे लगाए जाने थे, लेकिन मौके पर करीब 100 ही गड्ढे नजर आ रहे हैं। इनमें से भी अधिकतर रुद्राक्ष के पौधे नहीं दिखे। नवग्रह वाटिका में भी कुछ पौधे गायब हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि पौधारोपण केवल कागजों तक सीमित रह गया।
झरना, चिल्ड्रन पार्क और योग स्थल सिर्फ कागजों में
नगर वन को जंगल की तर्ज पर विकसित करने का दावा किया गया था। इसमें छोटा झरना, कमल युक्त जल संरचनाएं, योग स्थल, वॉकिंग-जॉगिंग ट्रैक और बच्चों के लिए चिल्ड्रन पार्क प्रस्तावित थे, लेकिन मौके पर न झरना दिखाई देता है, न बच्चों के झूले और न ही अन्य मनोरंजन सुविधाएं। कई स्थानों पर केवल अधूरी संरचनाएं खड़ी हैं।
भूजल संरक्षण और रेन वॉटर हार्वेस्टिंग भी गायब
भूजल संरक्षण, रेन वॉटर हार्वेस्टिंग, पेयजल, बेंच, फुटपाथ, साइकिल ट्रैक, डिस्प्ले बोर्ड और साइनेज जैसी जरूरी व्यवस्थाएं भी जमीन पर नजर नहीं आ रहीं। स्थानीय प्रजाति के पौधे, औषधीय और फलदार वृक्ष लगाने की योजना भी अधूरी है।
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जांच के बाद हो दोषियों पर कार्रवाई
जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजीव गुजराती का कहना है कि नगर वन को आम जनता के लिए सुकून और पर्यावरण जागरुकता का केंद्र बनना था, लेकिन यह प्रोजेक्ट अब भ्रष्टाचार का उदाहरण बनता नजर आ रहा है। रेंजर द्वारा आपत्ति दर्ज किए जाने के बाद भी फर्जी बिल बनाए जाने के आरोप गंभीर हैं।
अब जरूरत है कि पूरे मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सरकारी धन का दुरुपयोग किसके संरक्षण में हुआ और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जा सके।
नगर वन का काम नाकेदार व परिक्षेत्र सहायक देख रहे हैं। उनकी राशि में गड़बड़ी होने के कारण मैंने हस्ताक्षर नहीं किए हैं। साथ ही मैंने इस पर आपत्ति भी लगाई है।
-चंदर सिंह भिलाला, रेंजर सीहोर