
नवदुनिया प्रतिनिधि, सीहोर। सीहोर जिले के अमलाहा में शनिवार को दलहन उत्पादन और उत्पादकता को लेकर एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में देशभर से आए प्रतिनिधियों ने दलहन क्षेत्र की मूल आवश्यकताओं, वर्तमान चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर गहन विचार-विमर्श किया।
कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित देश के प्रमुख दलहन उत्पादक नौ राज्यों के कृषि मंत्री उपस्थित रहे। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने अतिथियों को अमलाहा स्थित क्षेत्र में तैयार चने और मसूर की उन्नत किस्मों की फसल का अवलोकन कराया। वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों ने उन्नत बीज, आधुनिक तकनीक और बेहतर उत्पादन पद्धतियों की जानकारी भी साझा की।
अमलाहा में आयोजित दलहन क्षेत्र के राष्ट्रीय सम्मेलन में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने देशभर से आए कृषि वैज्ञानिकों और नौ राज्यों के कृषि मंत्रियों का स्वागत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना विकसित और आत्मनिर्भर भारत का है। उन्होंने कहा कि दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता देश के लिए आवश्यक है और विदेशों से दाल आयात करना गर्व नहीं, बल्कि चिंता का विषय है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने 27 देशों के साथ समझौते किए, लेकिन किसानों के हितों से समझौता नहीं होने दिया। अब लक्ष्य है कि देश में दालों का उत्पादन बढ़ाया जाए। उन्होंने फसल विविधीकरण पर जोर देते हुए कहा कि एक ही फसल बोने से जमीन भी थकती है और कीटों का प्रकोप बढ़ता है, इसलिए चना, मसूर, उड़द और तुअर जैसी फसलों को बढ़ावा देना जरूरी है।
उन्होंने मध्य प्रदेश को दलहन उत्पादन में देश में नंबर वन बताते हुए कहा कि क्षेत्रफल में कमी चिंता का विषय है, जिसे बढ़ाने के प्रयास किए जाएंगे। (ICARDA) सहित अन्य अनुसंधान संस्थानों के सहयोग से उन्नत बीज विकसित किए जा रहे हैं, जो मौसम और बीमारियों के अनुकूल होंगे। बीज वितरण के लिए क्लस्टर विकसित किए जाएंगे और आदर्श खेती के लिए प्रति हेक्टेयर 10 हजार रुपये की सहायता भी दी जाएगी।
केंद्रीय मंत्री ने घोषणा की कि देशभर में 1000 नई दाल मिलें स्थापित की जाएंगी, जिनमें से 55 मध्य प्रदेश में लगेंगी। सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि तुअर 8000 रुपए प्रति क्विंटल, उड़द 7800 रुपए, चना 5875 रुपए और मसूर 7000 रुपए प्रति क्विंटल खरीदी जाएगी। “बीज से लेकर बाजार तक” किसानों की चिंता सरकार करेगी।
उन्होंने बताया कि सम्मेलन के बाद सभी राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ मंथन कर दलहन उत्पादन बढ़ाने का राष्ट्रीय रोडमैप तैयार किया जाएगा। इस मिशन के तहत मध्य प्रदेश को 354 करोड़ रुपए की राशि दी जाएगी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि असली आनंद खेत, किसान और मिट्टी से जुड़कर काम करने में है, और सरकार किसानों की आय बढ़ाने तथा देश को दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
कृषि आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा भारत : मुख्यमंत्री
अमलाहा में आयोजित दलहन क्षेत्र के राष्ट्रीय सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारतीय परंपरा में अन्न और दाल का विशेष महत्व है। हमारी थाली में परोसा गया अन्न ही हमारे लिए देवतुल्य है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय कृषि मंत्री का अभिनंदन करते हुए कहा कि किसान, युवा, गरीब और नारी सशक्तिकरण के लिए निरंतर योजनाएं चलाई जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की कृषि परंपरा प्राचीन और समृद्ध रही है। प्रदेश में स्थापित अनुसंधान केंद्र किसानों के हित में महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि हम दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनें, क्योंकि देश में मांग के अनुपात में उत्पादन अभी भी चुनौती बना हुआ है। डॉ. यादव ने कहा कि दलहन-तिलहन मिशन के अंतर्गत मध्य प्रदेश सरकार दो कदम आगे रहकर कार्य करेगी। उन्होंने बताया कि भावांतर योजना के माध्यम से किसानों को डेढ़ हजार करोड़ रुपए से अधिक राशि सीधे खातों में पहुंचाई गई।
सरकार किसानों की आय बढ़ाने और उनके जीवन स्तर में सुधार के लिए प्रतिबद्ध है, उन्होंने कहा कि प्रदेश में सिंचाई सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया गया है। पूर्व में जहां लगभग साढ़े सात लाख हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित था, वहीं अब इसे बढ़ाकर 44 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाया गया है। नदियों को जोड़ने के अभियान सहित विभिन्न परियोजनाओं के माध्यम से हर गांव तक सिंचाई सुविधा पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
मुख्यमंत्री ने अन्य राज्यों से आए कृषि मंत्रियों से भी आग्रह किया कि भारत की कृषि उपलब्धियों को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर दलहन उत्पादन बढ़ाने तथा किसानों को सशक्त बनाने की दिशा में ठोस कदम है।