
नवदुनिया प्रतिनिधि, सीहोर। भारत अपनी विविधताओं और पर्व-परंपराओं के लिए विश्वभर में अलग पहचान रखता है। इन्हीं परंपराओं में अब सीहोर की महादेव की होली भी एक विशिष्ट पहचान बना चुकी है। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के सानिध्य में भक्ति, आस्था और अनुशासन के साथ महादेव की होली मनाई जा रही है। काशी, मथुरा और बरसाने की तर्ज पर आयोजित यह अनूठा आयोजन अब शहर ही नहीं, बल्कि देशभर के श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बन गया है।
महादेव की होली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें केवल गुलाल और फूलों का प्रयोग किया जाता है। पानी या पानी में घोले गए रंगों का उपयोग पूर्णतः वर्जित रहता है। आयोजन समिति के अनुसार दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा और परंपरा की मर्यादा को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था की गई है। यह होली शिव और गुरु के सानिध्य में खेली जाने वाली आध्यात्मिक होली है, जो जीवन में सकारात्मकता और आनंद के रंग भरने का संदेश देती है।
इस वर्ष 5 मार्च को छावनी स्थित चमत्कारेश्वर महादेव मंदिर से महादेव की होली की शुरुआत हुई। यहां श्रद्धालुओं ने केसरिया रंग और गुलाल अर्पित कर भगवान शिव के साथ होली खेली। इसके पश्चात आयोजन की यात्रा शहर के प्रमुख शिवालयोंगुप्तेश्वर महादेव मंदिर, पिपलेश्वर महादेव मंदिर और नर्मदेश्वर महादेव मंदिर से होती हुई तहसील चौराहे स्थित प्राचीन मनकामेश्वर महादेव मंदिर पहुंचेगी, जहां विशेष आरती के साथ समापन होगा।

पूरे शहर में भक्ति का वातावरण देखने को मिला। शिव भजनों, ढोल-नगाड़ों और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से वातावरण गूंजायमान रहा। छावनी, मंडी, गंज और कस्बा सहित विभिन्न क्षेत्रों के श्रद्धालु पूरे उत्साह और अनुशासन के साथ आयोजन में शामिल हुए। मातृशक्ति सहित सभी भक्तों ने भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना कर एक लोटा चंदनयुक्त केसरिया जल अर्पित किया और उसके बाद गुलाल व पुष्पों से होली खेली।
पंडित प्रदीप मिश्रा ने देशवासियों से आह्वान किया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के शिव मंदिरों में भगवान शिव को चंदन युक्त जल अर्पित कर शांति और सद्भाव के साथ होली मनाएं। उन्होंने संदेश दिया कि उत्सव उत्साह के साथ-साथ संयम और मर्यादा में ही शोभा देता है।
श्रद्धालुओं का स्वागत भी केवल गुलाल और फूलों से करने की अपील की गई है। महादेव की यह दिव्य होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि आध्यात्मिक जागरण और गुरु-शिष्य परंपरा का प्रतीक बन चुकी है। ब्रज की होली की तरह अब सीहोर की महादेव होली भी देशभर में अपनी अलग पहचान स्थापित कर रही है, जिसका इंतजार हर वर्ष श्रद्धालु उत्सुकता से करते हैं।