
नईदुनिया प्रतिनिधि, सीहोर। ब्रिटिश सरकार ने प्रथम विश्व युद्ध के समय लिए 35 हजार रुपये के कर्ज की देनदारी से इन्कार कर दिया है। यह कर्ज सीहोर के प्रसिद्ध सेठ रुठिया के परिवार के सदस्य ने दिया था। रुठिया परिवार ने पिछले दिनों नोटिस भेजा था। अब ब्रिटेन (यूके) के ऋण प्रबंधन कार्यालय ने ईमेल भेजकर कहा है कि उनके पास इस कर्ज का कोई रिकार्ड मौजूद नहीं है।
दरअसल सीहोर जिले के रुठिया परिवार ने दावा किया है कि उनके पूर्वज सेठ जुम्मा लाल रुठिया ने 1917 में प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सरकार को 35 हजार रुपये का कर्ज दिया था। यह रकम ब्रिटिश सरकार ने कभी वापस नहीं की। इसकी वसूली के लिए कारोबारी विनय रुठिया ने अपने अधिवक्ता श्रेयांश रानीवाला के जरिए यूके (ब्रिटेन) सरकार को कानूनी नोटिस भेजा।
तीन अगस्त को ब्रिटेन के ऋण प्रबंधन कार्यालय ने ईमेल भेजकर रुठिया परिवार से इस कर्ज से संबंधित दस्तावेज, शर्तें व आवश्यक प्रमाण उपलब्ध कराने को कहा था।
इसके बाद विनय रुठिया ने ब्रिटिश सरकार के पोलिटिकल एजेंट के हस्ताक्षरयुक्त लिखित दस्तावेज और प्रमाणित रिकॉर्ड भेजे थे। यूके ऋण प्रबंधन कार्यालय के संचार विभाग ने 16 अक्टूबर को ईमेल के जरिए अपना जवाब भेजा है। इसमें कहा गया कि दावे की गहन जांच की गई, लेकिन उनके विभाग में इस कथित कर्ज का कोई आधिकारिक रिकार्ड या प्रमाण मौजूद नहीं है।
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इस आधार पर यूके सरकार ने भुगतान की किसी भी कानूनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है। विनय रुठिया इससे संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि यूके सरकार को इस ऐतिहासिक ऋण से संबंधित मामलों में पूरी पारदर्शिता बरतनी चाहिए।