• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • AI बूटकैंप
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • गणेशोत्‍सव 2026
  • हनुमान अंश
  • Mutual Funds मास्टरी
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • मानसून
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • शाजापुर

पर्दा लगाने से नहीं हुए भगवान के दर्शन, टूटा नियम तो शाजापुर में श्रद्धालु ने खुद के लिए बनवाया मंदिर

परमार, मुगल और मराठा राजाओं के पसंदीदा रहे दसवीं शताब्दी के शाजापुर नगर में स्थित एक मंदिर अपने निर्माण से लेकर उत्सव प्रियता के लिए चर्चित है। यहां श...और पढ़ें

By Mohit VyasEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Thu, 03 Sep 2026 06:22:33 PM (IST)Updated Date: Thu, 03 Sep 2026 06:22:33 PM (IST)
पर्दा लगाने से नहीं हुए भगवान के दर्शन, टूटा नियम तो शाजापुर में श्रद्धालु ने खुद के लिए बनवाया मंदिर
रुपयों और विदेश मुद्रा से मंदिर की सजावट। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. ट्रेजरार ऑफिसर की पत्नी ने मंदिर बनाकर किया दान, नाम पड़ा खजांची मंदिर
  2. जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण स्वरूप में दर्शन देंगे रामलला, विदेशी नोटों से होगी सजावट
  3. ट्रेजरार ऑफिसर की पत्नी हर दिन मंदिर पर भगवान के दर्शन के बाद ही भोजन करती थी

मोहित व्यास, नईदुनिया, शाजापुर : परमार, मुगल और मराठा राजाओं के पसंदीदा रहे दसवीं शताब्दी के शाजापुर नगर में स्थित एक मंदिर अपने निर्माण से लेकर उत्सव प्रियता के लिए चर्चित है। यहां श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण मंदिरों की तरह की उत्सव मनाया जाता है। लाखों भारतीय रुपये व विदेश मुद्रा से मंदिर की सजावट की जाती है।

इस मंदिर का निर्माण किसी राजा या महाराजा या धन्नासेठ ने नहीं, बल्कि शाजापुर के एक खजांची (कोषालय अधिकारी) ने करवाया था। प्रेरणादायक बात यह है कि इस मंदिर की नींव में केवल पत्थर नहीं, बल्कि एक श्रद्धालु का अटूट संकल्प, श्रद्धा और भगवान के प्रति समर्पण समाहित है।


करीब 85 वर्ष से मंदिर पर पूजा कर रहे परिवार के दूसरी पीढ़ी के पुजारी सीताराम तिवारी बताते हैं कि किस्सा यूं है कि करीब 200 वर्ष पहले शहर में पदस्थ ट्रेजरार ऑफिसर की पत्नी हर दिन मंदिर पर भगवान के दर्शन करने के बाद ही भोजन करती थी। एक दिन उन्हें मंदिर पहुंचने में देरी हो गई।

पुजारी ने गर्भगृह का पर्दा बंद कर दिया। उन्होंने पर्दा खोलकर दर्शन कराने का कई बार आग्रह किया किंतु पुजारी ने मंदिर की परंपरा का हवाला देकर पर्दा नहीं खोला। बोले दिया कि इतना ही दर्शन करना है तो खुद का मंदिर बना लो। पुजारी की बात महिला के मन में घर कर गई।

उसने प्रण लिया कि घर का मंदिर बनने के बाद ही वह अन्न ग्रहण करेंगी। पत्नी के फैसले और आस्था के आगे खजांची भी नतमस्तक हो गए उन्होंने तत्काल मंदिर के लिए स्थान खोजकर निर्माण कराया। मंदिर संचालन के लिए मंदिर संत को दान कर दिया। संत ने मंदिर का नाम खजांची मंदिर कर दिया। तभी से यहां भगवान की भक्ति और पर्व त्योहार पर उत्सव मनाए जा रहे हैं। जन्माष्टमी पर रामलाल को श्रीकृष्ण स्वरूप में श्रृंगारित किया जाता है और श्रीकृष्ण मंदिरों की तरह ही यहां भी जन्मोत्सव मनाया जाता है।

कई देशी की मुद्रा और लाखों रुपये से सजावट

खजांची मंदिर पर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर भगवान रामलला को श्रृंगार और गर्भगृह की सजावट विशेष रहती है। मंदिर की सजावट देश और विदेशी मुद्रा से की जाती है। जिसमें अमेरिका, नेपाल, भूटान, श्रीलंका या सऊदी अरब के साथ ही अन्य कई देश की मुद्रा शामिल रहती है।

खास बात यह भी है कि खजांची मंदिर भगवान श्री राम और माता सीता का है। किंतु जन्माष्टमी के मौके पर रामलला की मूर्ति का श्रंगार कृष्ण स्वरूप में किया जाता है। बकायदा पीतांबर धारण कराकर मुकुट पर मोरपंख सजाया जाता है।

पुजारी तिवारी के अनुसार विदेशी मुद्रा से सजावट की शुरुआत करीब 55 वर्ष पहले उनके पिता दुर्गाशंकर तिवारी ने एक रुपये से की थी। जो आज अब लाखों रुपये तक पहुंच गई है। मंदिर का निर्माण झालरिया मठ डीडवाना खजांची मंदिर की तर्ज पर किया गया है।

यह भी पढ़ें- एमपी में है अनूठा मंदिर जहां पग-पग पर श्रीकृष्ण की 16 कलाओं की झलक