
नईदुनिया प्रतिनिधि, शाजापुर/ शुजालपुर : राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) को तीन विश्वविद्यालयों में बांटने और नाम बदलने के फैसले पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। वहीं, गुरुवार को विश्वविद्यालय के कर्मचारियों ने भी प्रदर्शन किया। इसे लेकर उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने स्थिति स्पष्ट की है।
उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि आरजीपीवी पर 585 से ज्यादा कालेजों का दबाव था। इसके चलते व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही थीं। परीक्षा और परिणाम समय पर नहीं आ पा रहे। विश्वविद्यालय की बदनामी भी हुई। इन हालातों को देखते हुए सरकार ने तकनीकी शिक्षा को तीन हिस्सों में बांटने का फैसला किया।
कांग्रेस द्वारा सवाल उठाए जाने पर बोले की यह फैसला किसी व्यक्ति का नाम हटाने के लिए नहीं, बल्कि तकनीकी शिक्षा को बेहतर बनाने और विद्यार्थियों को बेहतर सुविधा देने के लिए किया गया है। मध्य प्रदेश की इलाके की बनावट के हिसाब से तीन यूनिवर्सिटी के नाम महाकोशल, मध्य भारत और मालवा रखे गए हैं।
सरकार नई शिक्षा नीति-2020 के हिसाब से शिक्षा में बदलाव और विस्तार कर रही है। आरजीपीवी इतना बड़ा हो गया था कि काम का दबाव बहुत बढ़ गया था। दूसरी ओर कांग्रेस नेता व पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने इंटरनेट मीडिया में पोस्ट कर इसे 'ओछी मानसिकता' बताया।
लिखा कि भाजपा खुद तो कोई नया काम नही कर पाती, बस कांग्रेस के जमाने के कार्यों की नाम पट्टिकाएं बदलने में लगी रहती है। इसे लेकर मंत्री परमार ने कहा कि परीक्षा और परिणाम में देरी जैसी समस्याओं के कारण विश्वविद्यालय की बदनामी हुई, व्यवस्था बेहतर करने और काम का दबाव कम करने के लिए इसे तीन भागों में बांटना जरूरी था।
प्रदेश में छात्रसंघ चुनाव को लेकर भी मंत्री परमार ने स्थिति स्पष्ट की। वह बोले कि विभाग न्यायालय के आदेश का अध्ययन कर रहा है। सही समय पर सही फैसला लिया जाएगा। छात्रसंघ चुनाव सीधे होंगे या परोक्ष, इस पर अभी सरकार ने कोई फैसला नहीं लिया है। विस्तृत जांच के बाद निर्णय लिया जाएगा।
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