
नईदुनिया प्रतिनिधि, श्योपुर। विजयपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर दाखिल याचिका पर आज ग्वालियर हाई कोर्ट में लंबी सुनवाई के बाद अंतिम बहस पूरी हो गई। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब इस मामले में हाईकोर्ट का निर्णय कभी भी आ सकता है। यह मामला पूर्व वन एवं पर्यावरण मंत्री रामनिवास रावत और विजयपुर कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा के बीच सीधे चुनावी टकराव का है।
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान पूरा फोकस एक ही बिंदु पर रहा। क्या विधायक मुकेश मल्होत्रा ने अपने चुनावी नामांकन और हलफनामे में अपने खिलाफ दर्ज सभी आपराधिक मामलों की सही और पूरी जानकारी दी? रामनिवास रावत की याचिका का कहना है कि विधायक ने गंभीर आपराधिक मामलों को जानबूझकर छुपाया और मतदाताओं के सामने अधूरी जानकारी रखी।
सवाल 1: याचिका किस आधार पर दाखिल की गई? याचिकाकर्ता पक्ष ने कोर्ट को बताया कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत प्रत्याशी को अपने खिलाफ दर्ज सभी आपराधिक मामलों की जानकारी देना अनिवार्य है। यह जानकारी सिर्फ हलफनामे तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसका सार्वजनिक प्रकाशन भी जरूरी है।
सवाल 2: आरोप कितने और किस तरह के हैं? कोर्ट को बताया गया कि विधायक मुकेश मल्होत्रा के खिलाफ कुल छह आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें से दो मामलों में कोर्ट सजा सुना चुका है। एक मामले में छह महीने की सजा और जुर्माना लगाया गया, जबकि एक अन्य मामले में उठने-बैठने तक की सजा दी गई। सजा के बाद विधायक को जेल भी जाना पड़ा।
सवाल 3: फिर नामांकन में सिर्फ दो मामले क्यों बताए गए? याचिकाकर्ता पक्ष का कहना है कि उपचुनाव के दौरान विधायक ने नामांकन फॉर्म और हलफनामे में सिर्फ दो आपराधिक मामलों की जानकारी दी, जबकि बाकी मामलों को छुपा लिया गया। यह मतदाताओं को गुमराह करने जैसा है।
विधायक मुकेश मल्होत्रा की ओर से हाईकोर्ट में चार अलग-अलग आवेदन पेश किए गए। इन आवेदनों में याचिका को गलत, भ्रामक और राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित बताया गया। विधायक पक्ष ने दलील दी कि जिन मामलों का उल्लेख नहीं किया गया, वे या तो छोटे थे या चुनावी अयोग्यता की श्रेणी में नहीं आते। साथ ही यह भी कहा गया कि याचिका के जरिए चुनाव परिणाम को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों से कानून के दायरे में रहकर स्पष्ट जवाब मांगे। कोर्ट ने यह जानना चाहा। क्या प्रत्याशी को अपने खिलाफ दर्ज हर आपराधिक मामले की जानकारी देना जरूरी है? - यदि किसी मामले में सजा हो चुकी है, तो क्या उसका उल्लेख अनिवार्य नहीं है? - क्या अधूरी जानकारी भी चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करती है।
कोर्ट ने यह भी संकेत दिए कि चुनावी हलफनामे में पारदर्शिता लोकतंत्र का मूल आधार है और इसमें किसी तरह की लापरवाही गंभीर मानी जाती है। बॉक्स चार महीने से कोर्ट में चल रहा मामला रामनिवास रावत ने यह याचिका करीब चार महीने पहले दाखिल की थी। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने विधायक की ओर से दिए गए आवेदनों पर जवाब देने के लिए रावत को समय दिया था। तय समय के भीतर जवाब पेश किए गए, जिसके बाद आज अंतिम सुनवाई हुई। अंतिम बहस के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।
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हाईकोर्ट के फैसले पर विजयपुर की राजनीति टिकी हुई है। यदि कोर्ट याचिका स्वीकार करता है, तो उपचुनाव पर बड़ा असर पड़ सकता है और विधायक की सदस्यता तक सवालों में आ सकती है। अगर याचिका खारिज होती है, तो मुकेश मल्होत्रा को बड़ी राहत मिलेगी। फिलहाल पूरा मामला हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहा है, जो कभी भी सामने आ सकता है।