

नईदुनिया प्रतिनिधि, शिवपुरी। आपने फिल्मों में देखा होगा कि कागजों में किसी जिंदा व्यक्ति को मृत दिखा दिया जाता है। ऐसा ही एक सनसनीखेज और सिस्टम की लापरवाही को शर्मसार करने वाला मामला शिवपुरी जिले के रन्नौद नगर परिषद से सामने आया है, जहां नप के बाबुओं ने एक पिता की मौत पर उसके जिंदा बेटे को ही कागजों में मार डाला, जिसके कारण वह तीन साल से शासकीय सुविधाओं और अधिकारों को पाने से वंचित है।
जानकारी के अनुसार रन्नौद के ग्राम सेसई वार्ड क्रमांक-15 गिटला के पिता जगनी आदिवासी का देहांत 24 अक्टूबर 2022 को हुआ था। पिता की मृत्यु के बाद बेटे ने नियमानुसार रन्नौद नगर परिषद में मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया। नप ने 12 अप्रैल 2023 को प्रमाण पत्र तो जारी कर दिया, लेकिन उसमें पिता जगनी आदिवासी की जगह बेटे गिटला आदिवासी को ही मृत बता दिया।
पीड़ित गिटला पढ़ा-लिखा नहीं है, इसलिए वह इस घोर लापरवाही को पकड़ ही नहीं पाया। गिटला का मृत्यु प्रमाण पत्र बनने के बाद उसका आधार कार्ड भी सस्पेंड कर दिया गया। ऐसे में अब उसे न तो प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिल पा रहा है और न ही कोई अन्य शासकीय सुविधा।
गिटला को इस गलती का पता तब चला जब वह अपने पिता की जमीन का नामांतरण अपने नाम कराने के लिए पटवारी के पास गया। जब उसने पटवारी को मृत्यु प्रमाण पत्र दिया तो पटवारी ने देखकर कहा कि, इसमें तो तुम्हें ही मरा हुआ बता दिया गया है। यह सुनकर गिटला के पैरों तले जमीन खिसक गई। गिटला का कहना है कि गलती का पता चलते ही वह रन्नौद नप के चक्कर काटने लगा। अधिकारियों ने हर बार सही कर देंगे, कहकर टाल दिया।
साल भर से ज्यादा चक्कर काटने के बाद उसने सीएम हेल्पलाइन 181 पर भी शिकायत दर्ज कराई, लेकिन वहाँ से भी कोई समाधान नहीं निकला। अंतत: गिटला ने प्रशासन से मांग की है कि उसके नाम से जारी फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र को तत्काल निरस्त कर उसे कागजों में जीवित किया जाए, उसका आधार कार्ड चालू कराया जाए और उसके पिता जगनी आदिवासी के नाम से सही मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया जाए।
नप की एक गलती ने गिटला की पूरी जिंदगी ही छीन ली है। कागजों में मृत घोषित होने के कारण उसका आधार कार्ड सस्पेंड कर दिया गया है। आधार बंद होने से वह शासन की सभी योजनाओं, राशन, पेंशन, किसान सम्मान निधि सहित सभी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हो गया है। पिता की जमीन का नामांतरण भी अटका पड़ा है।