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शिवपुरी के पोहरी किले में नारियल चढ़ाने से पूरी होती है मन्नत, 280 साल पहले पुणे से लाई गई थी श्रीजी की दिव्य मूर्ति

मान्यता है कि श्रीजी को इच्छापूर्ण गणेश के नाम से भी जाना जाता है। जिनका दिव्य स्वरूप हर पल बदलता हुआ महसूस होता है। देशभर से श्रद्धालु यहां श्रीजी को नारियल चढ़ाने आते हैं उसके बाद मन्नत पूरी होने पर भव्य कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहे है।

By Bharat SharmaEdited By: Rajdil Shivhare
Publish Date: Sun, 13 Sep 2026 05:33:59 PM (IST)Updated Date: Sun, 13 Sep 2026 05:34:38 PM (IST)
शिवपुरी के पोहरी किले में नारियल चढ़ाने से पूरी होती है मन्नत, 280 साल पहले पुणे से लाई गई थी श्रीजी की दिव्य मूर्ति
पोहरी किले में विराजमान श्रीजी और गणेशोत्सव के लिए तैयार हो रहीं मूर्तियां। नईदुनिया

HighLights

  1. बालाबाई सीतोले 1734 में पुणे से लाई थीं गणेश मूर्ति
  2. इच्छापूर्ण गणेश के नाम से प्रसिद्ध, बदलता है दिव्य स्वरूप
  3. गणेशोत्सव पर शिवपुरी जिले में 150 जगहों पर सजेंगे पंडाल

नईदुनिया प्रतिनिधि, शिवपुरी। शिवपुरी जिला मुख्यालय से महज 30 किमी दूर स्थित पोहरी किले में भगवान गणेश का ऐतिहासिक मंदिर मौजूद है। इस मंदिर में विराजी गणेशजी की मूर्ति अपने आप में दिव्य है। जिनके दर्शन करने और अपनी मन्नतें लेकर देशभर से श्रीजी की चौखट पर पहुंचते हैं। जहां श्रीजी को नारियल भेंट किया जाता है इसके बाद लोगों के कार्य सिद्ध हो जाते हैं। यह विश्वास सालों से लोगों के दिलों में बसा हुआ है।

मूर्ति को राजभवन के सामने मंदिर में कराया था विराजमान

जब सिंधिया स्टेट का दौर था उस समय बालाबाई सीतोले महाराष्ट्र के पुणे से श्रीजी की पूर्ति लेकर आईं थी और मूर्ति को राजभवन के सामने मंदिर में विराजमान कराया था। जिससे बालाबाई शितोले श्रीजी के दर्शन महल में रहते हुए भी कर सकें।


स्थानीय लोगों के अनुसार मान्यता है कि श्रीजी को इच्छापूर्ण गणेश के नाम से भी जाना जाता है। जिनका दिव्य स्वरूप हर पल बदलता हुआ महसूस होता है। देशभर से श्रद्धालु यहां श्रीजी को नारियल चढ़ाने आते हैं उसके बाद मन्नत पूरी होने पर भव्य कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहे है।

ये हैं सीतोले बालाबाई

  • स्थानीय लोगों के अनुसार 1734 में राजशाही थी और सिंधिया स्टेट के अंतर्गत पोहरी का किला आता था। बालाबाई सीतोले पोहरी की जागीरदारनी थीं। उस दौर में बालाबाई पुणे से भगवान गणेश की यह मूर्ति लेकर आई थी और उन्होंने अपने किले में इस मूर्ति का स्थापित कराया था।

जिले में 150 जगहों पर सजेगा श्रीजी का पंडाल

सोमवार से गणेशोत्सव की शुरूआत हो रही है। शहरी क्षेत्र में करीब आधा सैकड़ा जगहों पर भगवान गणेश के पंडाल सजेंगे। गणेशोत्सव समितियों की तैयारियां शुरू हो गई हैं। अगर जिलेभर की बात करें तो करीब डेढ़ सौ जगहों पर मूर्तियां रखी जाएंगी और पंडाल सजेंगे। कारीगर मिट्टी की मूर्तियों को अंतिम आकार देने में जुटे हुए हैं।

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