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मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष महेश केवट बने भाजपा के तीसरे राज्यसभा उम्मीदवार, बुंदेलखंड में ओबीसी कार्ड से फंसा कांग्रेस का पेंच

इस घोषणा से पहले राजधानी भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निवास पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच एक उच्च...और पढ़ें

By Manish AsatiEdited By: Rajdil Shivhare
Publish Date: Mon, 08 Jun 2026 02:26:52 PM (IST)Updated Date: Mon, 08 Jun 2026 02:29:14 PM (IST)
मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष महेश केवट बने भाजपा के तीसरे राज्यसभा उम्मीदवार, बुंदेलखंड में ओबीसी कार्ड से फंसा कांग्रेस का पेंच
भोपाल में राज्यसभा प्रत्याशी महेश केवट पत्रकारों के सवालों के जवाब देते हुए और विधानसभा की ओर गाड़ियों का जाता काफिला। नईदुनिया

नईदुनिया प्रतनिधि, टीकमगढ़ (निवाड़ी)। मध्य प्रदेश में आगामी राज्यसभा चुनाव की सियासी बिसात पर भारतीय जनता पार्टी ने रविवार रात एक ऐसा रणनीतिक मोहरा चला है, जिसने पूरे मुकाबले को बेहद दिलचस्प और अनिश्चित बना दिया है। भाजपा केंद्रीय चुनाव समिति ने दिल्ली से हरी झंडी मिलने के बाद मध्य प्रदेश मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष और ओबीसी समाज के कद्दावर नेता महेश केवट को अपना तीसरा प्रत्याशी घोषित कर दिया है।

इस घोषणा से पहले राजधानी भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निवास पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच एक उच्च स्तरीय रणनीतिक बैठक हुई थी, जिसमें महेश केवट के नाम पर आम सहमति बनी। गौरतलब है कि पार्टी के दो अन्य अधिकृत उम्मीदवार तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल पहले ही शनिवार को अपना नामांकन दाखिल कर चुके हैं। अब मैदान में महेश केवट के आ जाने से कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के निर्विरोध चुने जाने की संभावनाएं पूरी तरह खत्म हो गई हैं। इसके चलते अब 18 जून को मतदान होना तय माना जा रहा है।


बुंदेलखंड के सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश

प्रदेश के 52वें जिले निवाड़ी के अंतर्गत आने वाले श्रीरामराजा सरकार की नगरी ओरछा के निवासी महेश केवट लंबे समय से भाजपा संगठन में निष्ठापूर्वक सक्रिय हैं। उन्हें मध्य प्रदेश में केवट, निषाद, माझी और मछुआरा समाज की एक बेहद मजबूत व प्रभावशाली आवाज माना जाता है। बताया गया कि बुंदेलखंड क्षेत्र में अति पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं को एकजुट करने और सामाजिक समीकरणों को अपने पक्ष में मजबूत करने के लिए भाजपा ने यह बड़ा दांव खेला है। उनके गहरे जमीनी जुड़ाव और समाज पर व्यापक प्रभाव को देखते हुए ही शीर्ष नेतृत्व ने उन पर इतना बड़ा भरोसा जताया है।

संघ की शाखा से शुरू हुआ तीन दशकों का लंबा सियासी सफर

ओरछा में 28 अगस्त 1973 को जन्मे महेश केवट ने गणित विषय से स्नातक (बीएससी) की शिक्षा पूरी की है और वे मूल रूप से कृषि एवं व्यवसाय से जुड़े हैं। उनका राजनीतिक और सामाजिक सफर करीब तीन दशक पुराना है, जिसकी शुरुआत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से हुई थी। उन्होंने वर्ष 1984 से 1992 तक ओरछा शाखा में संघ के मुख्य शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दीं। इसी राष्ट्रवाद की विचारधारा के साथ आगे बढ़ते हुए वर्ष 1990 से 1992 के बीच उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के ब्लाक संयोजक और विश्व हिंदू परिषद की निवाड़ी प्रखंड कार्यकारिणी में सचिव के रूप में अपनी सांगठनिक क्षमताओं का परिचय दिया।

इसके बाद वे मुख्यधारा की राजनीति में आए और वर्ष 1995 में भारतीय जनता पार्टी की सक्रिय सदस्यता ग्रहण की, जिसके बाद वे 1998 तक जिला कार्यसमिति के सदस्य रहे। जमीनी स्तर पर लोकप्रियता के चलते वर्ष 2000 के स्थानीय निकाय चुनाव में वे पहली बार पार्षद चुने गए और इसके बाद वर्ष 2000 से 2005 तक उन्होंने नगर परिषद ओरछा के उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभालते हुए क्षेत्र के विकास में अहम भूमिका निभाई। संगठन में उनकी कर्मठता को देखते हुए पार्टी ने उन्हें लगातार प्रमोट किया।

ये भी पढ़ें: राज्यसभा चुनाव: मुख्यमंत्री माेहन यादव के साथ भाजपा प्रत्याशी महेश केवट नामांकन भरने विधानसभा पहुंचे

वे वर्ष 1999 से 2004 तक भाजपा माझी प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष रहे और फिर वर्ष 2004 से 2007 तक माझी प्रकोष्ठ के प्रदेश मंत्री के रूप में पूरे मध्य प्रदेश में अपने समाज को एकजुट करने का काम किया। इसके बाद वे मुख्य संगठन में लौटे और भाजपा टीकमगढ़ के जिला मंत्री 2008 से 2010 तक तथा जिला उपाध्यक्ष 2012 से 2016 तक जैसी महत्वपूर्ण सांगठनिक कमान संभाली। वर्ष 2016 से जून 2021 तक भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति का सदस्य भी बनाया गया। वर्तमान में राज्य सरकार ने उनकी वरिष्ठता और समाज पर पकड़ का सम्मान करते हुए उन्हें मध्य प्रदेश मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष का दायित्व सौंपा है और अब पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में भेजने के लिए मैदान में उतारकर बुंदेलखंड को एक बड़ा प्रतिनिधित्व दिया है।