
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन : कार्तिक मास के दौरान असामाजिक तत्वों ने प्राचीन श्री पुरुषोत्तम नारायण मंदिर में भगवान की मूर्ति को खंडित कर दिया। क्षीरसागर के समीप स्थित मंदिर में गुरुवार रात अज्ञात लोगों ने भगवान पुरुषोत्तम नारायण की मूर्ति की नासिका तोड़ दी। घटना से श्रद्धालुओं में आक्रोश है। मंदिर के पुजारी पं. शंकर लक्ष्मीनारायण जोशी ने पुलिस में शिकायत की है।
पं. जोशी ने बताया उज्जैन के प्राचीन नव नारायण मंदिरों में श्री पुरुषोत्तम नारायण मंदिर का विशेष स्थान है। यहां भगवान की प्राचीन मूर्ति विराजित है। शुक्रवार सुबह मूर्ति की नासिका क्षतिग्रस्त होने की जानकारी सामने आई। मंदिर में वर्तमान में प्रवेश द्वार नहीं होने से परिसर खुला रहता है। आशंका है कि इसी का फायदा उठाकर असामाजिक तत्वों ने प्रतिमा को नुकसान पहुंचाया।
800 साल पुरानी धार्मिक व पौराणिक महत्व की मूर्ति के भग्न हो जाने के बाद पुजारी पूजा अर्चना को लेकर पशोपेश में पड़ गए हैं। उनका कहना है कि सनातन धर्म परंपरा में खंडित मूर्ति का पूजन निषेध माना गया है। ऐसे में मंदिर में नई मूर्ति विराजित करें या फिर इसी मूर्ति की पूजा अर्चना करें, इसके लिए शास्त्र खंगाले जा रहे हैं।
पुजारी के अनुसार मंदिर में सुरक्षा की दृष्टि से कुछ वर्ष पहले पीतल का द्वार लगाया गया था। चोर उसे भी तोड़कर ले गए। मंदिर का पीतल का कलश भी चोरी हो चुका है। लगातार हो रही घटनाओं के बावजूद प्राचीन देवस्थान की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए। इसी की परिणाम है कि असामाजिक तत्वों ने अब भगवान की मूर्ति को खंडित कर दिया है।
त्रिवेणी कला संग्रहालय के संग्रह अध्यक्ष व पुराविद् योगेश पाल ने बताया भगवान विष्णु की यह मूर्ति 12 वीं-13 वीं शताब्दी की प्रतीत होती है। बलुआ पत्थर से निर्मित यह मूर्ति शिल्पांकन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। चतुर्हस्त मूर्ति के ऊपरी दोनों हाथ में शंख व गदा का अंकन है। नीचे के दोनों हाथ में से एक में शंख तथा दूसरा वरद मुद्रा में है। मूर्ति के अलंकृत आभूषण अत्यंत मनोहारी है।
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