
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर की सुरक्षा का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। इस बार सांसद अनिल फिरोजिया ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह व केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखकर मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था केंद्रीय औद्योगिक बल (सीआईएसफ) को सौंपने की मांग की है।
चार दिन पहले राज्यसभा सदस्य संत बालयोगी उमेशनाथ महाराज भी राज्यसभा में देश का ध्यान इस दिशा में आकर्षित करा चुके हैं। लंबे समय से चली आ रही इस मांग पर अब तक राज्य व केंद्र सरकार ने ध्यान नहीं दिया है।महाकाल मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था हमेशा से चर्चा का विषय रही है।
समय-समय पर जन प्रतिनिधि चाकचौबंद सुरक्षा व्यवस्था की मांग उठाते आए हैं। उनकी इस बात को इसलिए भी बल मिलता है कि बीते कुछ सालों में यहां बड़े अपराधी भी पकड़े गए हैं। उस समय कोई गंभीर हादसा तो नहीं हुआ, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था की कलाई अवश्य खुल गई थी।
सांसद अनिल फिरोजिया ने इस बात को गंभीरता से लिया और वे लगातार केंद्र सरकार से मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को सीआईएसएफ को सौंपने की मांग करते आ रहे हैं। इस बार उन्होंने देश के शीर्ष नेतृत्व को सीधे पत्र लिखा है। मंदिर समिति करीब डेढ़ दशक पहले सुरक्षा के लिहाज से मंदिर में नारियल भी प्रतिबंधित कर चुकी है।
महाकाल मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था सीआईएसएफ को सौंपने का मामला भले ही विचाराधीन हो, लेकिन देश की सुरक्षा एजेंसियों को इसकी चिंता है। साल 2023 में एनएसजी कमांडो ने यहां माकड्रिल की थी। इससे मंदिर की सुरक्षा को लेकर किए जा रहे उपायों के संबंध में भक्तों का भरोसा मजबूत हुआ था।
महाकाल मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बीते पांच साल से मंथन चल रहा है। जनवरी 2021 में सीआईएसएफ के कमांडेंट ने महाकाल मंदिर का निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया था। इसके अगले साल वर्ष 2022 में तत्कालीन एसपी सत्येंद्र कुमार शुक्ला ने सुरक्षा का पूरा मसौदा तैयार कर सीआईएसफ को सौंपा था।
बताया जाता है मामले में सीआईएसएफ ने इस पर प्रतिवर्ष सवा करोड़ रुपये खर्च होने बताया था। साथ ही यह भी कहा था कि 132 सशस्त्र जवानों की पूरी बटालियन मंदिर में तैनात रहेगी। हालांकि बाद में इस विषय पर कुछ नहीं हुआ।
वर्तमान में महाकाल मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था का जिम्मा एक निजी कंपनी के हाथ में है। चार माह पहले मंदिर समिति ने कोर कंपनी को यह ठेका दिया है। कंपनी ने मंदिर के सभी प्रवेश द्वार व परिसर में अपने गार्ड तैनात कर रखे हैं। बताया जाता है इनमें से अधिकांश गार्ड अनट्रेंड है।
मंदिर समिति खुद प्रशिक्षण शिविर लगाकर इन्हें प्रशिक्षित कराने का प्रयास करा रही है। बड़ी घटना दुर्घटना रोकना तो दूर यह गार्ड अभी ठीक तरीके से आग भी नहीं बुझा पा रहे हैं। शनिवार को मंदिर प्रशासन ने खुद माकड्रिल की जानकारी साझा कर यह बताया है कि गार्डों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।
सांसद अनिल फिरोजिया व राज्यसभा सदस्य संत बालयोगी उमेशनाथ जैसे जनप्रतिनिधियों को इसलिए महाकाल मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था की चिंता हो रही है कि एक साल बाद उज्जैन में सिंहस्थ महाकुंभ का आयोजन होना है। उस समय करीब दो तीन माह तक लाखों लोग प्रतिदिन भगवान महाकाल के दर्शन करने आएंगे। उस समय इन गार्डों के भरोसे व्यवस्था संचालित नहीं की जा सकती है। ऐसे में मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था अभी से एनएसजी को सौंपना आवश्यक है।
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