
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। शहर में यातायात नियम तोड़कर ई-चालान की राशि जमा नहीं करने वाले वाहन चालकों से अब निजी एजेंसी जुर्माना वसूलेगी। बकाया राशि नहीं चुकाने वालों के घर तक एजेंसी के कर्मचारी पहुंचेंगे और उन्हें चालान जमा कराने के लिए संपर्क करेंगे। उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड (यूएससीएल) ने लंबित और नए ई-चालानों की वसूली बढ़ाने के लिए एजेंसी नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और इसके लिए ई-टेंडर जारी कर दिया गया है।
सब कुछ ठीक रहा तो अगस्त महीने से वसूली प्रक्रिया शुरू हो सकती है। मालूम हो कि उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने शहर में इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) नवंबर- 2020 से लागू किया हुआ है। इसके तहत एएनपीआर कैमरे, रेड लाइट वायलेशन डिटेक्शन सिस्टम और स्पीड कैमरों के माध्यम से यातायात उल्लंघनों की पहचान कर ई-चालान जारी किए जाते हैं।
यह सिस्टम एमपी आरटीओ और राष्ट्रीय वाहन डाटाबेस ‘वाहन’ से जुड़ा हुआ है, जिससे प्रदेश ही नहीं, अन्य राज्यों में पंजीकृत वाहनों के चालान भी जारी किए जा रहे हैं। हालांकि चालान जनरेट होने और एसएमएस भेजे जाने के बावजूद उनकी वसूली का प्रतिशत काफी कम बना हुआ है।
नई एजेंसी लंबित और भविष्य में बनने वाले सभी ई-चालानों की वसूली में सहयोग करेगी। इसके लिए वाहन मालिकों को फोन कॉल, एसएमएस, वॉट्सएप, ई-मेल और पेमेंट लिंक भेजे जाएंगे। आवश्यकता पड़ने पर फील्ड कर्मचारी संबंधित व्यक्ति के पते पर जाकर भी चालान जमा कराने का प्रयास करेंगे।
एजेंसी को प्रत्येक वाहन मालिक से कम से कम तीन बार संपर्क करना अनिवार्य होगा। एजेंसी को पांच टेली कॉलर, एक कॉल सेंटर सुपरवाइजर, दस फील्ड एग्जीक्यूटिव, एक फील्ड मैनेजर, एक प्रोजेक्ट मैनेजर और एक आईटी-सीआरएम एडमिनिस्ट्रेटर की टीम तैनात करनी होगी। फील्ड स्टाफ जीपीएस युक्त मोबाइल फोन के साथ कार्य करेगा और प्रत्येक कॉल तथा विजिट का डिजिटल रिकार्ड रखा जाएगा।
स्मार्ट सिटी ने स्पष्ट किया है कि एजेंसी को किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई, जब्ती या दबाव बनाने का अधिकार नहीं होगा। पूरी प्रक्रिया नागरिक हितैषी और गैर-दबावपूर्ण तरीके से संचालित होगी। चालान की राशि सीधे ट्रैफिक पुलिस, परिवहन विभाग या स्मार्ट सिटी के अधिकृत खाते में जमा होगी।
एजेंसी के लिए कम से कम 12 लाख रुपये प्रतिमाह की वसूली का लक्ष्य रखा गया है। तय लक्ष्य हासिल नहीं होने पर मासिक भुगतान में दो प्रतिशत की कटौती की जाएगी। वहीं छह लाख रुपये से कम वसूली होने पर एजेंसी को कोई भुगतान नहीं मिलेगा और उतनी राशि की वसूली उससे की जाएगी। भुगतान केवल वास्तविक वसूली के आधार पर कमीशन के रूप में किया जाएगा।
डेटा सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी गई है। डेटा लीक होने पर 50 हजार रुपए का जुर्माना और अनुबंध समाप्त करने का प्रावधान रखा गया है। नागरिकों से दुर्व्यवहार पर पांच हजार रुपए प्रति घटना का दंड लगेगा, जबकि गलत रिपोर्टिंग पर 25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा।
प्रारंभिक अनुबंध तीन वर्ष का होगा, जिसे संतोषजनक प्रदर्शन के आधार पर एक-एक वर्ष के लिए दो बार बढ़ाया जा सकेगा। स्मार्ट सिटी को उम्मीद है कि इस नई व्यवस्था से लंबित ई-चालानों की वसूली में तेजी आएगी और शहर में यातायात नियमों के पालन की संस्कृति मजबूत होगी।
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