
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद अब उज्जैन के लोगों को आवारा कुत्तों के आतंक से राहत की उम्मीद जगी है। शहर की कालोनियों, सड़कों, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और महाकालेश्वर मंदिर क्षेत्र तक में आवारा कुत्तों के झुंड लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं। बीते चार महीनों में 3300 से ज्यादा लोग डाग बाइट का शिकार हो चुके हैं।
लगातार बढ़ते हमलों और लोगों के डर के बीच सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों से आवारा कुत्तों को हटाकर प्रभावी नियंत्रण किया जाए। कोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद अब नगर निगम ने भी आदेश का अक्षरशः पालन करने और शहर में विशेष अभियान चलाने की बात कही है।
नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार शहर में आवारा कुत्तों पर नियंत्रण के लिए अभियान तेज किया जाएगा। सार्वजनिक स्थानों, धार्मिक क्षेत्रों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में विशेष फोकस रहेगा। निगम पहले से चल रहे एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) और एंटी रेबीज वैक्सीनेशन अभियान को और प्रभावी बनाने की तैयारी कर रहा है। शहर में स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है।
खाराकुआं, फ्रीगंज, नानाखेड़ा, ऋषिनगर, देवास रोड, नमकमंडी और महाकाल मंदिर तक आवारा कुत्तों के झुंड सक्रिय हैं। मंगलवार को भी महाकाल मंदिर परिसर में एक महिला सफाई मित्र डॉग के हमले का शिकार हुई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं सबसे अधिक डॉग हमलों का शिकार हो रहे हैं। दोपहिया वाहन चालकों पर हमले लगातार बढ़े हैं। कई मामलों में बाइक सवार कुत्तों से बचने के प्रयास में गिरकर घायल भी हुए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने 19 मई को दिए आदेश में कहा है कि अस्पताल, स्कूल, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और अन्य भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों से पकड़े गए आवारा कुत्तों को दोबारा उसी स्थान पर नहीं छोड़ा जाए। अदालत ने राज्यों और नगर निकायों को एबीसी सेंटर बढ़ाने, वैक्सीनेशन अभियान चलाने और शेल्टर व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।कोर्ट ने यह भी कहा कि लोगों को सुरक्षित माहौल में जीने का अधिकार है और डॉग बाइट की घटनाओं को सामान्य समस्या मानकर नहीं छोड़ा जा सकता।
लगातार बढ़ती शिकायतों के बीच नगर निगम ने कुत्तों की आबादी नियंत्रित करने को 35 लाख रुपये की नई कार्ययोजना शुरू की है। इसके तहत सदावल स्थित एबीसी सेंटर में कुत्तों की नसबंदी और एंटी रेबीज टीकाकरण कराया जाएगा। निगम ने हर महीने करीब 300 कुत्तों की नसबंदी का लक्ष्य तय किया है।
साथ ही पहली बार शहर के 54 वार्डों में डिजिटल डाग सर्वे भी कराया जाएगा, ताकि हाटस्पाट क्षेत्रों की पहचान की जा सके। हालांकि शहरवासियों का कहना है कि योजनाएं पहले भी बनीं, लेकिन जमीन पर असर दिखाई नहीं दिया। अब सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद लोगों को उम्मीद है कि इस बार कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि शहर की सड़कों पर भी दिखाई देगी।