• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
naidunia animated logo
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • कोरोना वायरस
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • स्‍वतंत्रता दिवस
  • सावन माह
  • मानसून
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • वास्‍तु शास्‍त्र
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • उमरिया

बांधवगढ़ ने जंगली हाथियों को दिया अपना ठिकाना, सुकून से बदली जंगल की कहानी

बांधवगढ़ प्रदेश में एकमात्र नेशनल पार्क है, जहां जंगली हाथी हैं। इसके पीछे यहां के वातावरण को ही मुख्य माना गया है। इन दिनों बांधवगढ़ में वे सभी वन्य ...और पढ़ें

By SanjayKumar SharmaEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Tue, 11 Aug 2026 12:28:18 PM (IST)Updated Date: Tue, 11 Aug 2026 12:28:18 PM (IST)
बांधवगढ़ ने जंगली हाथियों को दिया अपना ठिकाना, सुकून से बदली जंगल की कहानी
बांधवगढ़ के जंगल में दिखाई दे रहा एक जंगली हाथी। नईदुनिया

HighLights

  1. सीधी, शहडोल, अनूपपुर, डिडौंरी में जहां गजराज बन रहे चुनौती
  2. बांधवगढ़ में हाथियों के लिए प्रोजेक्ट एलिफेंट की दरकार
  3. आठ सालों से 70 से ज्यादा जंगली हाथियों की यहां मौजूदगी

संजय कुमार शर्मा, नईदुनिया उमरिया। बांधवगढ़ में जंगली हाथियों ने सुकून की एक सकारात्मक कहानी रच दी है। बांधवगढ़ ने भी उन्हें ठिकाना देकर निश्चिंत कर दिया है। मध्य प्रदेश के सीधी, शडोल, अनूपपुर और डिडौंरी में जहां गजराज चुनौती बने हुए हैं। वहीं बांधवगढ़ में अपना आवास प्राप्त करने के बाद ये हाथी यहीं के होकर रह गए हैं।

जैव विविधता को किया सार्थक

दुनिया भर में जैव विविधता (विभिन्न जीव रूपों में पाई जाने वाली विविधता) के लिए अपनी पहचान रखने वाला बांधवगढ़ नेशनल पार्क छत्तीसगढ़ और झारखंड के हाथियों के यहां आकर बसने से समृद्ध हो गया। पिछले आठ सालों से 70 से ज्यादा जंगली हाथियों की यहां मौजूदगी है। जंगली हाथियों ने यहां आकर ही वास्तव में बांधवगढ़ को जैव विविधता की पहचान भी दिलाई है।


बांधवगढ़ इसलिए है खास

बाघ, तेंदुआ, सुस्त भालू, जंगली बिल्लियां, चित्तीदार हिरण, सांभर हिरण, नीलगाय, चिंकारा, भारतीय मृग, चौसिंघा, चार सींग वाला मृग, भारतीय बाइसन गौर, लंगूर, जंगली सूअर, साही, लाल और भारतीय ग्रे नेवला, पाम सिवेट, रस्टी-स्पॉटेड बिल्ली, जंगली बिल्लियां, जंगली कुत्ता, सैंकड़ो प्रजाति के पक्षी और सांप सहित कई अन्य वन्य प्राणी शामिल है जो बांधवगढ़ में जैव विविधता को सार्थक करते हैं।

जरूरी है प्रोजेक्ट एलीफेंट

अब बांधवगढ़ में हाथियों की सुरक्षा और उनके विस्तार को संरक्षित करने के लिए प्रोजेक्ट एलिफेंट शुरू किए जाने की जरूरत विशेषज्ञ जता रहे हैं। इससे हाथी संरक्षित होंगे और हाथी-मानव द्वंद्व भी समाप्त होगा। जंगली हाथी और मानव द्वंद रोकने की दिशा में लंबे समय से काम करने वाले पुष्पेन्द्रनाथ िद्ववेदी का कहना है कि जिस तरह से छत्तीसगढ़ में प्रोजेक्ट एलीफेंट चलाया गया है उसी तरह से मध्यप्रदेश में भी यह प्रोजेक्ट चलाया जाना चाहिए।

यह होगा फायदा

हाथी और मानव द्वंद जैसी कई बाधाओं को प्रोजेक्ट एलिफेंट के माध्यम से दूर किया जा सकता है। छत्तीसगढ़ में लेमरू ( हाथी) प्रोजेक्ट के तहत धरमजयगढ़ वन मंडल में हाथी कॉरिडोर में आने वाले कापू, बोरो तथा धरमजयगढ़ रेंज के जंगलों में बांस उगाए गए। ताकि हाथी अपने पसंदीदा भोजन खाने में ही व्यस्त रहे और किसानों की फसलों की ओर रुख न करें।

हाथियों के झुंड के व्यवहारों का अध्ययन करेगा

मध्य प्रदेश में एलीफेंट प्रोजेक्ट चलाया जाए तो हाथियों से बचाव के लिए स्थानीय लोगों को शिक्षित किया जाना आसान हो जाएगा। प्रोजेक्ट एलिफेंट के अंतर्गत केंद्रीय दल मध्य प्रदेश आएगा जो असम और केरल के राज्यों के अनुभवों के साथ यहां के हाथियों के झुंड के व्यवहारों का अध्ययन करेगा और उसके संबंध में अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को देगा। इससे हाथियों के संरक्षण पर काम किया जा सकेगा। अर्थ-व्यवस्था आधारित गतिविधियों से लोगो को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध होगा और वन्य जीवों के साथ जंगल का भी संरक्षण होगा।

इस तरह आए जंगली हाथी

वर्ष 2018 में जंगली हाथियों ने छत्तीसगढ़ से मध्य प्रदेश में आना शुरू किया। छत्तीसगढ़ के जनकपुर से मध्य प्रदेश के शहडोल और अनूपपुर के रास्ते यह हाथी यहां पहुंचे। एक वर्ष में इनकी संख्या 80 हो गई थी। आज बांधवगढ़ में 70 से ज्यादा जंगली हाथी हैं जो अलग-अलग झुंड में बंटे हुए हैं।

यह भी पढ़ें- जबलपुर के बरगी बांध को लबालब होने में डेढ़ मीटर की कमी, 15 अगस्त तक 421 मीटर जलस्तर पहुंचने का लक्ष्य