उमरिया में नौ महीने बाद फायरिंग मामले में एक्शन, दो आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज, SDO सुचिता मेश्राम के सरकारी बंगले का मामला
घटना 27 नवंबर 2025 की रात की बताई जा रही है। मामले में पुलिस ने अमानगंज, पन्ना निवासी सत्येंद्र शुक्ला और महाराजपुर, मंडला निवासी अतुल बाजपेई के खिलाफ...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 20 Sep 2026 12:30:51 PM (IST)Updated Date: Sun, 20 Sep 2026 12:30:51 PM (IST)
हर्ष फायरिंग मामले में नौ महीने बाद एक्शन, (फोटो- प्रतीकात्मक)HighLights
- उमरिया में नौ महीने बाद पुलिस का एक्शन
- फायरिंग मामले में दो के खिलाफ मामला दर्ज
- एसडीओ के सरकारी बंगले पर हुई थी फायरिंग
नईदुनिया प्रतिनिधि, उमरिया। वन विकास निगम की तत्कालीन प्रभारी एसडीओ सुचिता मेश्राम के शासकीय बंगले में जन्मदिन समारोह के दौरान हुई हर्ष फायरिंग के मामले में करीब नौ महीने बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है।
घटना 27 नवंबर 2025 की रात की बताई जा रही है। मामले में पुलिस ने अमानगंज, पन्ना निवासी सत्येंद्र शुक्ला और महाराजपुर, मंडला निवासी अतुल बाजपेई के खिलाफ अपराध दर्ज किया है। पुलिस की कार्रवाई एसपी विजय बागवानी और एसडीओपी पीएल परस्ते के निर्देशन में हुई है।
वीडियो हुआ था वायरल
जानकारी के अनुसार, 27 नवंबर की रात वन विकास निगम के बंगले में जन्मदिन का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसी दौरान कई राउंड फायरिंग किए जाने की बात सामने आई थी। फायरिंग का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।
वीडियो सामने आने के बावजूद लंबे समय तक मामले में एफआईआर दर्ज नहीं होने को लेकर सवाल उठते रहे। अब पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपितों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है।
तब थीं प्रभारी एसडीओ
घटना के समय सुचिता मेश्राम वन विकास निगम में प्रभारी एसडीओ के पद पर पदस्थ थीं। बाद में उनका प्रमोशन होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब यह भी जांच करेगी कि फायरिंग किस हथियार से की गई, कितने राउंड फायर हुए और समारोह में मौजूद अन्य लोगों की भूमिका क्या थी।
प्रभाव से देरी
मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी रही कि आरोपितों की पहुंच और प्रभाव के कारण कार्रवाई में देरी हुई। हालांकि, इस संबंध में पुलिस की जांच और एफआईआर में दर्ज तथ्यों के आधार पर ही स्थिति स्पष्ट होगी। सत्येंद्र शुक्ला को लेकर यह आरोप भी लगाए जाते रहे हैं कि वन विकास निगम के कार्यों में उसका हस्तक्षेप रहता है तथा उसके कुछ वन अधिकारियों से करीबी संबंध हैं।
स्थानीय स्तर पर उसके क्षेत्र के रेत कारोबार से जुड़े लोगों से संबंध होने की बातें भी सामने आई हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पुलिस जांच में जुटी
पुलिस द्वारा अब एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद मामले की जांच शुरू हो गई है। पुलिस वायरल वीडियो, घटनास्थल, कार्यक्रम में मौजूद लोगों तथा फायरिंग में इस्तेमाल हथियार से संबंधित साक्ष्यों की जांच कर सकती है।
करीब नौ महीने बाद हुई इस कार्रवाई के बाद अब यह भी महत्वपूर्ण होगा कि जांच में फायरिंग के कारण, हथियार की वैधता और घटना में शामिल अन्य लोगों की भूमिका को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं।