
नवदुनिया प्रतिनिधि, विदिशा। जिले की लटेरी तहसील की 20 ग्राम पंचायतों में जल जीवन मिशन के नाम पर सरकारी सिस्टम की ऐसी ''जादूगरी'' सामने आई है, जहां नलों से पानी की एक बूंद नहीं टपकी, लेकिन बिजली के बिलों ने सरपंचों के होश उड़ा दिए हैं। पीएचई विभाग और बिजली कंपनी के बीच तालमेल की इस बड़ी लापरवाही का आलम यह है कि धरातल पर योजनाएं अधूरी पड़ी हैं, पर कागजों में मोटरें ''दौड़'' रही हैं।
वीरपुर कला जैसी पंचायतों में तो स्थिति हास्यास्पद और गंभीर दोनों है, जहां न तो पानी की टंकी पूरी बनी है और न ही ट्यूबवेल का खनन हुआ है, फिर भी विभाग ने साढ़े चार लाख रुपये का बिजली बिल थमा दिया है।
सरकारी दावों की पोल खोलता यह मामला केवल एक पंचायत का नहीं, बल्कि लटेरी जनपद की लगभग 20 पंचायतों का है। यहां ठेकेदारों ने पाइपलाइन डालकर काम अधूरा छोड़ दिया और बिजली विभाग ने बिना सत्यापन किए ही बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया कागजों पर पूर्ण मान ली।
परिणाम स्वरूप, जिन ग्रामीणों को गर्मी में राहत की उम्मीद थी, वे आज भी मीलों दूर से पानी ढोने को मजबूर हैं, जबकि पंचायतों के खाते बिजली बिलों के भारी-भरकम बोझ से दब चुके हैं। लटेरी जनपद क्षेत्र में कुल 61 ग्राम पंचायतें आती है। जिनमें जल जीवन मिशन और जल निगम के तहत बीते पांच वर्षों के दौरान नल जल योजनाएं मंजूर हुई थी लेकिन इस योजना में बड़े पैमाने पर हुए भ्रष्टाचार ने सरकार की हर घर नल से जल पहुंचाने की मंशा पर ही पानी फेर दिया।
लटेरी सरपंच संघ के अध्यक्ष दिनेश शर्मा के मुताबिक उनके क्षेत्र में आधे से अधिक पंचायतों में नल जल योजना ठप्प है। यह योजना पंचायतों को हस्तांतरित भी नहीं हुई लेकिन विभाग ने इसे चालू बता दिया। उनका कहना था कि जिला प्रशासन को ग्राम पंचायतों में नल जल योजना का भौतिक सत्यापन करना चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति उजागर हो सके।
ग्राम पंचायत शहरखेड़ा के सरपंच हरपाल सिंह जादौन के मुताबिक करीब 300 घरों की आबादी वाले इस गांव में वर्ष 2021 में करीब 86 लाख रुपये की लागत से नल जल योजना मंजूर हुई थी लेकिन पांच वर्षों बाद भी यह योजना पूर्ण नहीं हो पाई है। पेयजल के लिए बनाई टंकी शुरू होने से पहले ही जर्जर हो गई। पाइप लाइन जगह-जगह से टूट गई।
आधे से अधिक घरों में अब तक नल कनेक्शन नहीं दिए लेकिन बिजली विभाग ने इस अधूरी नल जल योजना का 18 लाख रुपये का बिल थमाया है। वहीं ग्राम पंचायत मूंडरा रतनसिंह के सरपंच दिनेश शर्मा ने बताया कि उनकी पंचायत के गांव मुक्ताखेड़ा में 63 लाख रुपये से नल जल योजना मंजूर हुई थी, जो अब तक अधूरी है।
यह योजना पंचायत को हस्तांतरित ही नहीं हुई लेकिन बिजली बिल डेढ़ लाख रुपये आया है। कागजों पर योजना पूर्ण, थमाया साढ़े चार लाख का बिजली बिल वीरपुर कला गांव में तो योजना का काम ही शुरू नहीं हुआ लेकिन पंचायत को साढ़े चार लाख रूपये का बिजली बिल थमा दिया गया। इस पंचायत की सरपंच कलाबाई अहिरवार ने बताया कि यह योजना उनके कार्यकाल के पहले मंजूर हुई थी।
अभी न तो पेयजल टंकी बनी है और ना ही ट्यूबवेल खोदा है, ताकि घरों तक पानी पहुंचाया जा सके। लेकिन उन्हें इस योजना का साढ़े चार लाख का बिल मिला है। उन्हीं की पंचायत में अमीनपुर गांव भी आता है। जहां चार-पांच घर है और वहां छोटी टंकी से पानी वितरित होता है। यह योजना बीते तीन वर्षों में सिर्फ छह माह चली होगी लेकिन इसका बिजली बिल भी चार लाख रुपये भेजा गया है।
सरपंचों की इस शिकायत के बाद कलेक्टर अंशुल गुप्ता ने पीएचई, बिजली विभाग और पंचायत विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने पंचायतों को मनमाने बिजली बिल जारी करने पर बिजली विभाग के अधिकारियों से जवाब तलब किया लेकिन वे कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। उन्होंने तीनों विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे आपस में समन्वय बनाकर इन शिकायतों का निराकरण कराए। पीएचई के कार्यपालन यंत्री अनुपम गहोई ने बताया कि इस संबंध में बिजली कंपनी के उप संभाग गंजबासौदा के अधिकारियों से जानकारी ली जा रही है।
उन्होंने बताया कि ये पुराने बकाया बिल है जो ग्राम पंचायतों को अब भेजे जा रहे है। उन्होंने कहा कि जल्दी ही बिजली बिलों को ठीक कराया जाएगा। नाराज सरपंचों ने दी आंदोलन की चेतावनी पीएचई और बिजली विभाग की यह गड़बड़ी तब सामने आई, जब मंगलवार को लाखों के बिजली बिल लेकर लटेरी क्षेत्र के सरपंच कलेक्टर से मिलने विदिशा आए। सरपंचों ने कलेक्टर को बताया कि ल कई पंचायतों में नल-जल योजना का कार्य पूर्ण नहीं हुआ है और न ही नियमित रूप से पानी सप्लाई शुरू हो सकी है, इसके बावजूद बिजली विभाग द्वारा मोटी राशि के बिल जारी कर दिए गए हैं।
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कुछ मामलों में मार्च माह के बिलों में तीन गुना तक बढ़ोतरी भी दर्ज की गई है, जिससे पंचायतों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। सरपंचों का कहना था कि बिना उपयोग के ही बिजली बिल वसूला जाना अनुचित है। उन्होंने साफ कहा कि यदि बिजली बिलों की जांच नहीं की तो वे आंदोलन को मजबूर होंगे।