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कुपोषण से लड़ाई पर संकट: MP के 8 जिलों में 3 महीने से नहीं पहुंचा पोषण आहार; विदिशा में 2744 बच्चों की सेहत पर मंडराया खतरा

सागर जिले में स्थित एक निजी पोषण आहार प्लांट से यह राशन आता था। प्लांट संचालक का करीब 40 करोड़ रुपये का भुगतान अटक गया है। जिसके कारण संचालक ने प्लांट...और पढ़ें

By Ajay JainEdited By: bhupendra Singh Rajput
Publish Date: Thu, 25 Jun 2026 02:31:30 PM (IST)Updated Date: Thu, 25 Jun 2026 02:31:30 PM (IST)
कुपोषण से लड़ाई पर संकट: MP के 8 जिलों में 3 महीने से नहीं पहुंचा पोषण आहार; विदिशा में 2744 बच्चों की सेहत पर मंडराया खतरा
फाइल फोटो।

HighLights

  1. विदिशा, रायसेन, सागर, छतरपुर, दमोह, टीकमगढ़, पन्ना और निवाड़ी जिलों में पिछले तीन माह से टेक होम राशन की आपूर्ति बंद
  2. केवल विदिशा में 72,562 हितग्राही प्रभावित हैं, जिनमें 44 हजार बच्चे सहित गर्भवती महिलाएं,धात्री माताएं और किशोरियां शामिल
  3. सागर स्थित पोषण आहार प्लांट का करीब 40 करोड़ रुपये भुगतान अटकने के कारण आपूर्ति बंद हुई

नईदुनिया प्रतिनिधि, विदिशा। कुपोषण के विरुद्ध लड़ाई में पूरक पोषण आहार का मोर्चा बिखर रहा है। प्रदेश के आठ जिलों विदिशा, रायसेन, सागर, छतरपुर, दमोह, टीकमगढ़, पन्ना और निवाड़ी में पिछले तीन महीनों से पोषण आहार मिलना बंद हो गया है।

इसकी वजह से विदिशा जिले में अति कुपोषित और कुपोषित की श्रेणी में दर्ज 2744 बच्चों की सेहत पर खतरा मंडरा रहा है। इसका असर जिले की 72 हजार गर्भवती, धात्री महिलाओं और रक्ताल्पता से जूझ रहीं किशोरियों पर भी पड़ रहा है, जिनके लिए यह पोषाहार जरूरी है।


ये है योजना

टेक होम राशन महिला एवं बाल विकास विभाग की एक पोषण योजना है। इसमें आंगनबाड़ी केंद्रों से लोगों को घर ले जाने के लिए पौष्टिक खाद्य सामग्री दी जाती है। यह सामग्री छह माह से तीन वर्ष तक के बच्चे, गर्भवती महिलाएं, धात्री (स्तनपान कराने वाली) माताओं, किशोरी बालिकाओं और कुपोषित बच्चों की दी जाती है।

इसमें सत्तू, दलिया, खिचड़ी प्रीमिक्स, उपमा प्रीमिक्स, पौष्टिक हलवा मिश्रण, मल्टीग्रेन आटा, प्रोटीन, आयरन और कैल्शियम युक्त फोर्टिफाइड खाद्य सामग्री होती है।

तीन माह से बंद है वितरण

जिले में पिछले तीन माह से टेक होम राशन आया ही नहीं है। जिसके कारण आंगनबाड़ी केंद्रों से इनका वितरण नहीं हो रहा है। जिले में तीन वर्ष तक के 44 हजार 85 बच्चे, आठ हजार 550 गर्भवती महिलाएं, छह हजार 391 धात्री और 13 हजार 536 किशोरियां इस योजना से जुड़ी हैं। यानी कुल 72 हजार 562 हितग्राही पिछले तीन महीने से राशन का इंतजार कर रहे हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं नियमित रूप से राशन की जानकारी लेने आंगनबाड़ी पहुंच रही हैं। उन्हें यही जवाब मिल रहा है कि भोपाल से आपूर्ति नहीं आई है।

बढ़ रहा कुपोषण, छह माह में 2744 बच्चे मिले

महिला एवं बाल विकास विभाग के आंकड़ों के अनुसार जनवरी से 23 जून तक जिले में 383 गंभीर कुपोषित, 1394 मध्यम कुपोषित और 967 कम वजन वाले बच्चों की पहचान की गई है। यानी छह माह में कुल 2744 ऐसे बच्चे मिले हैं जिन्हें अतिरिक्त पोषण और विशेष देखभाल की जरूरत है।

हर माह 426 टन राशन का होता है वितरण

विभागीय के अनुसार बच्चों के लिए हर माह 248 मीट्रिक टन, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के लिए 132 मीट्रिक टन तथा किशोरियों के लिए 46 मीट्रिक टन राशन की आवश्यकता होती है। यानी हर माह कुल 426 मीट्रिक टन पोषण आहार वितरित किया जाता है। अप्रैल से वितरण बंद होने के कारण तीन महीने में करीब 1278 मीट्रिक टन पोषण आहार हितग्राहियों तक नहीं पहुंच पाया है।

यह भी पढ़ें- आंगनवाड़ी से मिले सत्तू पैकेट में निकला मरा हुआ सांप, डेढ़ साल की बच्ची को मिला था पोषण आहार, ग्रामीणों का भारी हंगामा

इसलिए ठप हुई टेक होम राशन की आपूर्ति

विभागीय सूत्रों का कहना है कि जिले में सागर स्थित एक निजी पोषण आहार प्लांट से यह राशन आता था। प्लांट संचालक का करीब 40 करोड़ रुपये का भुगतान अटक गया है। जिसके कारण संचालक ने प्लांट ही बंद कर दिया। दोबारा आपूर्ति के लिए वह दरों में वृद्धि की मांग भी कर रहा है। पिछले तीन माह से यह मामला राज्य स्तर पर फाइलों में उलझा है।

जिले में मार्च के बाद से टेक होम राशन की आपूर्ति नहीं हुई है। तीन माह में छह बार वरिष्ठ कार्यालय को पत्र लिख चुके है। हर बार वीडियो कांफ्रेंसिंग में राशन उपलब्ध कराने का आग्रह किया जाता है लेकिन अब तक आपूर्ति शुरू नहीं हुई है।- विनीता कासवा, जिला परियोजना अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग।